हरियाणा में 15,000 तो नोएडा में 11,000 क्यों? B.Tech पास मजदूर 11 हजार में मजबूर!
दिल्ली से सटे औद्योगिक शहर नोएडा में इस वक्त हालात किसी युद्ध क्षेत्र से कम नहीं हैं। पिछले एक हफ्ते से जो गुस्सा फैक्ट्रियों की चहारदीवारी के भीतर सुलग रहा था, आज सोमवार को वह ज्वालामुखी बनकर सड़कों पर फट पड़ा। जिस नोएडा को 'सपनों का शहर' और 'इंडस्ट्रियल हब' कहा जाता है, आज वहां की हवाओं में आंसू गैस के गोले और जलते टायरों का धुआं तैर रहा है। जी हां वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ एक शांतिपूर्ण आंदोलन अब एक उग्र 'मजदूर क्रांति' की शक्ल अख्तियार कर चुका है। पत्थरबाजी, आगजनी, और पुलिस के साथ सीधी भिड़ंत ने प्रशासन से लेकर लखनऊ तक की नींद उड़ा दी है।
दरअसल, इस पूरे बवाल की जड़ पड़ोसी राज्य हरियाणा सरकार का एक फैसला है। हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने 1 अप्रैल से न्यूनतम मजदूरी में 35 फीसदी की भारी-भरकम बढ़ोतरी का ऐलान किया, जिससे वहां के अकुशल श्रमिकों का वेतन सीधे 11,275 से बढ़कर 15,220 हो गया। जैसे ही यह खबर नोएडा के होजरी कॉम्प्लेक्स और फेज-2 की कंपनियों तक पहुंची, मजदूरों के सब्र का बांध टूट गया। मजदूरों का सीधा तर्क है: "जब कंपनी एक है, काम एक है, तो फरीदाबाद में ज्यादा और नोएडा में कम सैलरी क्यों?" रिचा ग्लोबल जैसी कंपनियों में, जिनकी यूनिट्स दोनों राज्यों में हैं, यह भेदभाव आंदोलन की सबसे बड़ी वजह बना। मजदूरों का कहना है कि जब फरीदाबाद में टेक्निकल स्टाफ को 20,000 रुपये मिल सकते हैं, तो नोएडा में उन्हें 10-12 हजार पर क्यों काम कराया जा रहा है? वहीं सोमवार की सुबह जैसे ही फैक्ट्रियों में शिफ्ट शुरू होने का वक्त हुआ, हजारों मजदूर काम का बहिष्कार कर सड़कों पर उतर आए। नोएडा फेज-2, सेक्टर-83, 84, 59 और 62 में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। सबसे उग्र प्रदर्शन मदरसन कंपनी के बाहर देखा गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने जमकर पत्थरबाजी की।
गुस्साए कर्मचारियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। सेक्टर-84 में दो गाड़ियां धू-धू कर जलती नजर आईं। पुलिस की पीसीआर वैन और राइडर बाइक भी प्रदर्शनकारियों के निशाने पर रहीं। एनएच-9 और नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सुबह ऑफिस जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे। स्थिति को संभालने के लिए पीएसी और आरएएफ की टुकड़ियों को मैदान में उतारना पड़ा।
आपको बता दें इस आंदोलन के पीछे सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि पेट की आग है। प्रदर्शन में शामिल एक महिला कर्मचारी का दर्द पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है: "11 हजार की सैलरी में 4 हजार का तो गैस सिलेंडर और राशन आ जाता है, 400 रुपये किलो तो दाल-तेल के भाव पहुंच रहे हैं, बच्चों को क्या खिलाएं और मकान मालिक को किराया क्या दें? हैरानी की बात यह है कि इन प्रदर्शनकारियों में सिर्फ अनपढ़ मजदूर नहीं, बल्कि BA, B.Com और B.Tech पास युवा भी शामिल हैं। इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 के डरावने आंकड़े बताते हैं कि डिग्री होने के बावजूद स्किल की कमी के कारण ये युवा 10-12 हजार की मजदूरी करने को मजबूर हैं। कंपनियों के लिए ये सिर्फ कच्चा माल हैं, जिन्हें न्यूनतम सुविधाओं पर निचोड़ा जा रहा है। वहीं हालात को बिगड़ता देख यूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश खुद कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग कर रहे हैं। नोएडा पुलिस ने सख्त चेतावनी दी है कि उपद्रवियों और भड़काने वाले बाहरी तत्वों को चिन्हित कर जेल भेजा जाएगा। गाजियाबाद और दिल्ली पुलिस को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है क्योंकि यह आग फरीदाबाद के सेक्टर-37 तक फैल चुकी है। दरअसल, मजदूरों की मांगें हैं कि...
न्यूनतम वेतन 20,000 मासिक किया जाए।
ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से हो।
बोनस 30 नवंबर तक खाते में आए।
रविवार को काम करने पर डबल पेमेंट और साप्ताहिक अवकाश।
अनावश्यक छंटनी पर तुरंत रोक लगे।
आपको बता दें नोएडा ही नहीं, हरियाणा के औद्योगिक इलाके भी सुलग रहे हैं। IMT मानेसर में पहले ही धारा 163 लागू है। वहां पुलिस और मजदूरों के बीच हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। फरीदाबाद के सेक्टर-37 में भी हजारों मजदूरों ने काम ठप कर दिया है। पूरे दिल्ली-एनसीआर का औद्योगिक पहिया थमने की कगार पर है। वहीं नोएडा अथॉरिटी और श्रम विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में बैठकें कर 'समान काम-समान वेतन' और 'न्यूनतम मजदूरी' का आश्वासन तो दिया है, लेकिन मजदूर अब कागजी वादों पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। वे 'लिखित गारंटी' और 'तत्काल वृद्धि' की मांग पर अड़े हैं। 16 अप्रैल को गुरुग्राम में एक बड़े प्रोटेस्ट की आहट ने प्रशासन की धड़कनें और बढ़ा दी हैं। देखा जाए तो यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि मध्यम और निम्न वर्ग के उस गुस्से का विस्फोट है जो बढ़ती महंगाई और स्थिर आय के बीच पिस रहा है। अगर समय रहते फैक्ट्रियों के मालिकों और सरकार ने बीच का रास्ता नहीं निकाला, तो यह औद्योगिक क्रांति आने वाले दिनों में और भी भयानक रूप ले सकती है।


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