वेतन की जंग में जला नोएडा, सड़कों पर उतरा मजदूरों का सैलाब

नोएडा के औद्योगिक गलियारों से आज ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे देश को दहला दिया है। दिल्ली से सटा यह हाईटेक शहर आज धुएं के गुबार और पत्थरों की गड़गड़ाहट से कांप उठा। जो मजदूर कल तक फैक्ट्रियों में पहिया घुमा रहे थे, आज वही मजदूर 'इंकलाब' के नारों के साथ सड़कों पर आगजनी कर रहे हैं। नोएडा का फेज-2 आज किसी छावनी में तब्दील हो गया है, जहाँ पुलिस की लाठियां और आंसू गैस के गोले बेकाबू भीड़ को थामने की कोशिश कर रहे हैं। क्या यह केवल वेतन की जंग है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश? जी हां आज नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, उसने 2013 के उस खौफनाक मंजर की याद दिला दी जब शहर घंटों तक जलता रहा था। आइए जानते हैं नोएडा के इस महासंग्राम की पल-पल की पूरी कहानी!

नोएडा के फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स और सेक्टर-84 में सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे हालात उस वक्त हाथ से निकल गए, जब हजारों की संख्या में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। पिछले तीन दिनों से चल रहा शांतिपूर्ण धरना अचानक उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल सड़कें जाम कीं, बल्कि औद्योगिक इकाइयों पर पथराव शुरू कर दिया। भीड़ का गुस्सा इतना भयानक था कि सेक्टर-84 में खड़ी कई गाड़ियों को निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की दो गाड़ियों को पलट दिया और उनमें आग लगा दी। देखते ही देखते पूरा इलाका 'वॉर ज़ोन' बन गया। पुलिस ने जब स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए लाठीचार्ज किया, तो भीड़ और ज्यादा हिंसक हो गई, जिसके जवाब में पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। दरअसल, प्रदर्शनकारी कर्मचारी लंबे समय से वेतन वृद्धि और कामकाज की खराब परिस्थितियों को लेकर मोर्चा खोले हुए हैं। उनकी मांगें हैं कि...

नोएडा में भी हरियाणा के मानेसर की तर्ज पर न्यूनतम वेतन ढांचा लागू किया जाए।

अकुशल श्रमिकों के लिए 15,220, अर्धकुशल के लिए 16,781, कुशल के लिए 18,501 और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए 19,426 मासिक वेतन किया जाए। 

8 घंटे की शिफ्ट के लिए कम से कम 20,000 वेतन मिलना चाहिए और ओवरटाइम का भुगतान समय पर और दोगुना होना चाहिए।

वहीं प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर महिलाओं के साथ बदसलूकी और डंडों-चेन से पीटने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
आपको बता दें यह विरोध प्रदर्शन अब केवल नोएडा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-3 क्षेत्र तक फैल गया है। शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और गंभीर हो गई जब भीड़ और पुलिस के बीच बहस के दौरान गोलियां चल गईं। इस गोलीबारी में बिहार की रहने वाली एक महिला कर्मचारी को दो गोलियां लगीं, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में गोलियों की आवाज़ और भागते हुए लोग साफ़ देखे जा सकते हैं।
आज हुए हंगामे के दौरान प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके साथ लगातार नाइंसफी हो रही है। कंपनी 8 घंटे के लिए कम से कम 20 हजार रुपये वेतन दे। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि महिलाओं के साथ पुलिस बदसलूकी कर रही है। उन्हें भी डंडे व चेन से पीटा जा रहा है। मेरे 12 साथी थाने में बंद कर दिए गए हैं। वहीं बिगड़ते हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा संभाल लिया है। रविवार रात हुई हाई-लेवल मीटिंग में सीएम ने सख्त निर्देश दिए हैं कि....

अब श्रमिकों को ओवरटाइम के लिए नियमित मजदूरी से दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा।
साप्ताहिक अवकाश देना अनिवार्य होगा।
अगर रविवार को काम कराया जाता है, तो उसकी दर दोगुनी होगी। 
सैलरी और बोनस में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भुगतान सीधे बैंक खातों में करना होगा।

वहीं सीएम योगी ने अगले 24 घंटे के भीतर औद्योगिक प्राधिकरणों को उद्योग संगठनों के साथ बैठकर विवाद सुलझाने के आदेश दिए गए हैं। सीएम ने चेतावनी दी है कि श्रमिकों के नाम पर माहौल बिगाड़ने वाले 'नक्सली विचारधारा' के तत्वों और उपद्रवियों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं डीएम मेहा रूपम ने श्रमिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। डीएम मेहा रूपम ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

वहीं दूसरी तरफ इस उग्र प्रदर्शन का सबसे बुरा असर दिल्ली-एनसीआर के ट्रैफिक पर पड़ा। सेक्टर-62, सेक्टर-60, चिल्ला बॉर्डर और NH-9 पर मीलों लंबा जाम लग गया। पीक आवर्स में हुए इस हंगामे के कारण ऑफिस जाने वाले लोग घंटों गाड़ियों में फंसे रहे। स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि लोग अपनी गाड़ियां छोड़कर वापस मुड़ने को मजबूर हो गए।

देखा जाए तो नोएडा के फेज-2 में छाई यह खामोशी किसी बड़े तूफान से पहले की शांति लग रही है। पुलिस की गश्त जारी है, कंपनियों के शटर गिरे हुए हैं और मजदूरों की आंखों में गुस्सा बरकरार है। प्रशासन भले ही कह रहा हो कि मांगें मान ली गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ऐसे में सवाल है कि क्या 15,000 और 20,000 की इस लड़ाई में नोएडा की औद्योगिक साख पर दाग लग जाएगी? एक तरफ सरकार के सख्त नियम हैं, तो दूसरी तरफ मजदूरों का अपना वजूद। अब देखना यह होगा कि प्रशासन का 'संवाद' काम आता है या फिर यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा। फिलहाल के लिए नोएडा फेज-2 छावनी बना हुआ है और हर आंख कल की सुबह का इंतजार कर रही है। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। 

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