नोएडा हिंसा के पीछे 'बाहरी तत्वों' का हाथ; 24 घंटे में बने 50 फर्जी अकाउंट्स

बात करेंगे उस धधकते नोएडा की, जिसने दिल्ली-एनसीआर की धड़कनें रोक दीं। जिस शहर की पहचान गगनचुंबी इमारतों और हाईटेक फैक्ट्रियों से थी, वहां अचानक आसमान में धुएं का गुबार और सड़कों पर सिर्फ पत्थरों की गूंज सुनाई देने लगी है। 42 हजार कर्मचारियों का सैलाब, 80 से ज्यादा जगहों पर तांडव और 3000 करोड़ का भारी-भरकम नुकसान! आखिर 6 दिन से शांतिपूर्ण चल रहा प्रदर्शन अचानक हिंसक ज्वालामुखी कैसे बन गया? क्या यह वाकई सिर्फ वेतन बढ़ाने की मांग थी या फिर पश्चिमी यूपी को सुलगाने की कोई गहरी और खौफनाक साजिश? सीएम योगी की 24 घंटे की डेडलाइन के बावजूद आखिर किसने नोएडा की सड़कों पर बारूद बिछाया? आज हम विस्तार से चर्चा करेंगे नोएडा के इस घमासान की...

दरअसल, नोएडा हिंसा की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब सरकार और उद्योगपति मांगों पर सहमत हो रहे थे, ठीक उसी वक्त हिंसा भड़की। खुफिया रिपोर्ट और पुलिस जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि प्रदर्शन की आड़ में बाहरी तत्वों ने घुसपैठ की थी। चश्मदीदों के मुताबिक, गाड़ियों में आग लगाने वाले 18 से 20 साल के लड़के थे, जो श्रमिक नहीं लग रहे थे। वे खुद आग लगाते और फिर उसका वीडियो बनाकर वायरल करते थे, ताकि दहशत फैलाई जा सके। वहीं हाल ही में गिरफ्तार किए गए 4 संदिग्धों ने पहले ही कबूला था कि वे यूपी में आगजनी और वाहनों को फूंकने की बड़ी प्लानिंग कर रहे हैं। नोएडा की घटना उसी स्लीपर सेल या साजिश का हिस्सा मानी जा रही है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस के हाथ कुछ ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप और इंस्टाग्राम चैट लगी हैं, जिनमें लाठीचार्ज के बाद फिर से जुटने और माहौल बिगाड़ने की अपील की गई थी।

आपको बता दें सोमवार का दिन नोएडा के औद्योगिक इतिहास का सबसे काला दिन साबित हुआ। सेक्टर-2, 63, 67 और 84 जैसे इलाके युद्ध के मैदान बन गए। सेक्टर-63 में उपद्रवियों ने दर्जनों नई कारों के शीशे तोड़ दिए और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। फेज-2 में फैक्ट्रियों के गेट पर हमला हुआ, बिजली के खंभे तक उखाड़ दिए गए। सेक्टर-15 और 62 के पास हजारों की भीड़ ने नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे को घंटों जाम रखा, जिससे आम जनता कांप उठी। वहीं हिंसा के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा संभाला। हाई पावर कमेटी की सिफारिशों को रात डेढ़ बजे ही मंजूरी दे दी गई। सरकार ने वेतन में लगभग 21% से 26% तक की भारी बढ़ोतरी की है। जिसमें...

अकुशल मजदूर अब 11,313 के बजाय 13,690 प्रति महीना पाएंगे।
अर्ध-कुशल का वेतन 15,059 तय किया गया है।
कुशल मजदूर को अब 16,868 प्रति महीना मिलेगा।

दरअसल, यह दरें गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के लिए सबसे अधिक रखी गई हैं क्योंकि यहां जीवन यापन का खर्च ज्यादा है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि वेतन वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से ही यानि पिछली तारीख से लागू मानी जाएगी। वहीं दूसरी तरफ नोएडा की इस आग ने लखनऊ की सियासत को भी गर्मा दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे सरकार की नाकामी करार दिया। उन्होंने पूछा कि जब खुफिया विभाग को पता था तो वे क्या बंगाल में प्रचार कर रहे थे? अखिलेश ने इसे डबल इंजन की जगह ट्रबल इंजन सरकार बताया और कहा कि मजदूरों के जख्मों पर नमक छिड़कना बंद करें। 

वहीं आज मंगलवार के हालात की बात करें तो स्थिति को देखते हुए आज नोएडा की सभी फैक्ट्रियों को बंद रखा गया है। चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल और STF तैनात है। लेकिन इसी बीच अब मेड और घरेलू सहायिकाओं ने भी वेतन बढ़ाने के लिए सेक्टर-121 जैसी सोसायटियों के बाहर मोर्चा खोल दिया है, जिससे नया संकट खड़ा होता दिख रहा है। पुलिस ने अब तक 300 लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा है और 50 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की है जो जहर उगल रहे थे। हैरानी की बात ये है कि ये सभी अकाउंट 24 घंटे के अंदर बनाए गए थे। 

कुल मिलाकर देखा जाए तो नोएडा की ये आग सिर्फ वेतन की कमी से नहीं सुलगी, बल्कि इसमें साजिश का घी भी डाला गया है। सरकार ने भले ही रातों-रात खजाना खोलकर मजदूरों की झोली भर दी हो, लेकिन जो 3000 करोड़ की संपत्ति खाक हुई और जो दहशत नोएडा के उद्यमियों के मन में बैठी, उसकी भरपाई कौन करेगा? क्या ये वेतन वृद्धि उन नकाबपोश हमलावरों को शांत कर पाएगी जिनका मकसद सिर्फ तबाही था? अखिलेश यादव के तीखे हमले और योगी सरकार की STF जांच के बीच अब ये साफ है कि ये लड़ाई अब सिर्फ सैलरी की नहीं, बल्कि 2027 की सियासी बिसात की है। 

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