'O’ Romeo: सिनेमा, अंडरवर्ल्ड और बदले की कहानी , सपना दीदी से हुसैन उस्तारा तक

BY - UJJWAL SINGH

 

जब रील में दिखती है रियल क्राइम की परछाईं ,हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और असल ज़िंदगी के अपराधों का रिश्ता दशकों पुराना है. खासतौर पर मुंबई का अंडरवर्ल्ड, जो कभी डोंगरी की तंग गलियों से निकलकर दुबई तक फैला, सिनेमा के लिए हमेशा रहस्यमयी और रोमांचक विषय रहा है। इसी कड़ी में एक बार फिर अंडरवर्ल्ड का चर्चित नाम हुसैन उस्तारा सुर्खियों में है, वजह है नई फिल्म ओ रोमियो। फिल्म के निर्देशन की कमान संभाली है विशाल भारद्वाज ने और लीड रोल में नजर आएंगे शाहिद कपूर.

सिनेमा और असलियत का संगम

भले ही मेकर्स दावा कर रहे हों कि ओ रोमियो किसी की बायोपिक नहीं है, लेकिन फिल्म का बैकड्रॉप और किरदार दर्शकों को अंडरवर्ल्ड के असली चेहरों की याद दिला देता है.हुसैन उस्तारा की ज़िंदगी खुद में किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही,जहां अपराध, वफादारी, प्यार और हिंसा एक-दूसरे में गुथे रहे। यही वजह है कि दर्शक फिल्म को देखते हुए रियल लाइफ कनेक्शन तलाशने लगते हैं.

उस्तारा का किरदार: खून, इश्क और अंदरूनी जंग

फिल्म में शाहिद कपूर एक बेरहम हिटमैन ‘उस्तारा’ की भूमिका में हैं। बाहर से खतरनाक, लेकिन भीतर से टूटा हुआ इंसान। कहानी में मोड़ तब आता है जब उसकी ज़िंदगी में अफ्शा की एंट्री होती है, जिसका किरदार निभा रही हैं त्रिप्ति डिमरी .रोमांस और हिंसा का यह टकराव फिल्म को इमोशनल गहराई देता है। टीज़र में शाहिद का खून से सना चेहरा और टूटी हुई आंखें दर्शकों को बांध लेती हैं.

सपना दीदी: बदले से जन्मी एक आग

जहां हुसैन उस्तारा की कहानी अपराध से जुड़ी थी, वहीं सपना दीदी की कहानी बदले की आग से शुरू होती है .उनके पति महमूद खान की हत्या दाऊद इब्राहिम के गैंग द्वारा किए जाने के बाद, सपना दीदी की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई. एक आम महिला से अंडरवर्ल्ड की चुनौती बनना आसान नहीं था .इस सफर में हुसैन उस्तारा ने उन्हें फाइटिंग, बाइकिंग और हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी.

शारजाह क्रिकेट मैच और अधूरा मिशन

सपना दीदी और हुसैन उस्तारा की सबसे साहसी साजिश थी शारजाह में क्रिकेट मैच के दौरान दाऊद इब्राहिम को मारने की योजना। यह प्लान नाकाम रहा.1994 में सपना दीदी की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिससे बदले की यह कहानी एक दर्दनाक अंत तक पहुंची.

किताबों में दर्ज इतिहास

हुसैन उस्तारा और सपना दीदी की कहानी इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के ज़रिए सामने आई. खासतौर पर डोंगरी टू दुबई में उन्हें मुंबई अंडरवर्ल्ड के अहम किरदारों के रूप में दर्ज किया गया है.

 रील में रियल की झलक
ओ रोमियो भले ही आधिकारिक तौर पर काल्पनिक हो, लेकिन इसकी आत्मा में अंडरवर्ल्ड की सच्ची कहानियों की धड़कन साफ महसूस होती है। यही बॉलीवुड का जादू है—जहां हकीकत और कल्पना मिलकर एक ऐसी कहानी रचती हैं, जो लंबे समय तक याद रह जाती है

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