परियोजना कॉलोनी से आवास खाली कराने के दबाव के खिलाफ प्राचार्य व प्राध्यापकों का विरोध,मंत्री को सौंपा ज्ञापन
ओबरा : ओबरा तापीय विद्युत परियोजना प्रशासन द्वारा परियोजना कॉलोनी में आवंटित आवासों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के खाली कराने के कथित मनमाने दबाव के विरोध में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा के प्राचार्य एवं प्राध्यापकों ने बुधवार को माननीय अनुसूचित जाति/जनजाति एवं समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से परियोजना प्रबंधन की कार्यवाही को अनुचित, अन्यायपूर्ण और वादाखिलाफी करार देते हुए हस्तक्षेप की मांग की गई।ज्ञापन में अवगत कराया गया कि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के अधीन पूर्णतः सरकारी संस्था है, जिसके प्राचार्य एवं प्राध्यापक प्रथम श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी हैं। महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1982 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा अपने सामाजिक दायित्व के तहत कराई गई थी। उस समय परिषद ने महाविद्यालय के प्राध्यापकों व कर्मचारियों को निगमीय कर्मचारियों की भांति परियोजना कॉलोनी में आवास, विद्युत, पानी एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का वचन दिया था। इसी कारण महाविद्यालय परिसर में आवासों का निर्माण नहीं कराया गया और परियोजना कॉलोनी में ही आवास आवंटित किए गए।
प्राचार्य व प्राध्यापकों का आरोप है कि अब ओबरा डी परियोजना के नाम पर उसी कॉलोनी में निगमीय अधिकारी-कर्मचारी रहते हुए भी केवल महाविद्यालय के प्राध्यापकों व कर्मचारियों से आवास खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जो भेदभावपूर्ण है। उन्होंने इसे सोची-समझी साजिश बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह अवैधानिक और अन्यायपूर्ण प्रतीत होती है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ओबरा एक छोटा क्षेत्र है, जहां निजी आवासीय सुविधाएं न के बराबर हैं। ऐसे में बिना वैकल्पिक आवास दिए आवास खाली कराना कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। प्राचार्य एवं प्राध्यापकों ने मांग की कि महाविद्यालय परिसर में आवासों का निर्माण कराया जाए और जब तक निर्माण पूर्ण न हो, तब तक परियोजना प्रशासन स्थापना के समय दिए गए वचन का पालन करते हुए परियोजना कॉलोनी में ही आवास उपलब्ध कराए।
इस संबंध में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, जिलाधिकारी तथा उपजिलाधिकारी से भी हस्तक्षेप की अपील की गई है। प्राचार्य व प्राध्यापकों ने स्पष्ट किया कि बिना वैकल्पिक आवास आवंटित किए उनके वर्तमान आवास खाली न कराए जाएं, ताकि वे बिना मानसिक तनाव के अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
रिपोर्टर : कुम्धज चौधरी

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