“पुराना बस्ता”
लघुकथा:
गाँव के एक छोटे से स्कूल में आरव नाम का लड़का पढ़ता था। वह बहुत होशियार था, लेकिन उसके पास नया बस्ता नहीं था। वह अपने बड़े भाई का पुराना फटा हुआ बस्ता ही इस्तेमाल करता था।
कक्षा के कुछ बच्चे उसे देखकर हँसते थे। कोई कहता, “देखो, इसका बस्ता कितना पुराना है!” आरव चुपचाप सब सुन लेता, लेकिन कभी शिकायत नहीं करता।
एक दिन स्कूल में परीक्षा थी। सभी बच्चे नए-नए पेन और बस्ते लेकर आए थे। आरव ने अपने पुराने बस्ते से किताबें निकालीं और मेहनत से परीक्षा देने लगा।
परीक्षा के बाद परिणाम आया। आरव पूरे स्कूल में प्रथम आया। शिक्षक ने सबके सामने उसकी तारीफ की और कहा,
“कपड़े और सामान नहीं, मेहनत और लगन इंसान को आगे बढ़ाते हैं।”
उस दिन पहली बार वही बच्चे जो उसका मजाक उड़ाते थे, उसकी इज्जत करने लगे।
आरव घर आया तो उसने अपने पिता से कहा,
“मुझे नया बस्ता नहीं चाहिए, मुझे बस और पढ़ना है।”
उसके पिता की आँखें नम हो गईं।
संदेश :
सफलता बाहरी चीजों से नहीं, मेहनत और आत्मविश्वास से मिलती है।
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