800 रुपये क्विंटल पर आया प्याज, लागत निकालना भी मुश्किल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत के प्याज बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। निर्यात प्रभावित होने से देश की मंडियों में प्याज की आपूर्ति बढ़ गई है, जिससे कीमतें अचानक गिरकर लगभग 800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं। इस स्थिति में महाराष्ट्र के किसानों के लिए अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
इसी समस्या को देखते हुए महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज किसान संगठन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने की मांग की है, ताकि सरकार सीधे किसानों से प्याज खरीद सके। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा संचालित होती है।
किसान संघ के अनुसार, पिछले चार हफ्तों में युद्ध के कारण 150 से ज्यादा प्याज से भरे कंटेनर अलग-अलग बंदरगाहों पर अटक गए हैं। इससे घरेलू बाजार में प्याज की अधिकता हो गई और थोक कीमतों में भारी गिरावट आई। पहले जहां फरवरी के अंत तक प्याज के दाम 1500 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर थे, वहीं अब कुछ जगहों पर यह 300 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं।
उत्पादन लागत 1000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक होने के बावजूद किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है, जिससे वे घाटे और कर्ज में फंस रहे हैं। किसान संघ का कहना है कि यह स्थिति सरकारी हस्तक्षेप की मांग करती है, इसलिए जल्द से जल्द इस योजना को लागू किया जाना चाहिए। साथ ही, तहसील स्तर पर खरीद की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पहले से ही निर्यात नीतियों के कारण किसान परेशान थे, और अब युद्ध ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। पिछले दो वर्षों में प्याज का निर्यात 25 लाख टन से घटकर 12 लाख टन रह गया है।
वहीं, राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक समिति गठित की है, जो किसानों की मदद के लिए जरूरी कदम सुझाएगी। मुख्यमंत्री जल्द ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्री से मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। फिलहाल सरकार बाजार में संतुलन बनाए रखने और किसानों को राहत देने के प्रयास कर रही है।
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