पाकिस्तान की निकल पड़ी! सऊदी और कतर ने खोल दिया खजाना, 5 अरब डॉलर से मचेगी खलबली!
कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए खाड़ी देशों से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। जब एक तरफ विदेशी मुद्रा भंडार सूख रहा था और दूसरी तरफ अरबों डॉलर का कर्ज चुकाने की तलवार लटकी थी, तब सऊदी अरब और कतर संकटमोचक बनकर सामने आए हैं। क्या यह 5 अरब डॉलर की मदद पाकिस्तान की डूबती नैया को पार लगा पाएगी? आइए समझते हैं इस पूरी आर्थिक कूटनीति को।
पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसी महीने (अप्रैल 2026) के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है। यह कर्ज 2018 से लगातार रोलओवर (आगे बढ़ाया) किया जा रहा था। सऊदी अरब ने न केवल अपनी 5 अरब डॉलर की जमा राशि की अवधि बढ़ाई है, बल्कि कतर के साथ मिलकर अतिरिक्त 5 अरब डॉलर की सहायता का भरोसा भी दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार UAE की जगह कतर अधिक सक्रिय भूमिका में नजर आ रहा है।
एक तरफ खाड़ी देशों से फंड की बात चल रही है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब इस वक्त वॉशिंगटन में हैं। IMF-विश्व बैंक स्प्रिंग मीटिंग्स (13-18 अप्रैल): औरंगजेब यहाँ नए कर्ज प्रोग्राम और पुराने आर्थिक प्रतिबंधों में ढील पाने की कोशिश करेंगे। संकेत मिल रहे हैं कि IMF अब अपनी उन सख्त शर्तों (जैसे तीसरे पक्ष की गारंटी) में ढील दे सकता है, जो पहले पाकिस्तान के लिए गले की फांस बनी हुई थीं। सऊदी अरब के वित्त मंत्री से मुलाकात और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ लंबी मंत्रणा के बाद यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान अब 'कर्ज को आगे बढ़ाने' के बजाय 'कर्ज चुकाने' की साख बनाना चाहता है। "3.5 अरब डॉलर का भुगतान करने का फैसला यह दर्शाता है कि पाकिस्तान अपनी वैश्विक वित्तीय साख (Financial Credibility) को सुधारने की कोशिश कर रहा है।"
सऊदी और कतर की यह मदद तत्काल नकदी संकट (Liquidity Crisis) को तो टाल देगी, लेकिन पाकिस्तान की दीर्घकालिक स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह IMF की बैठकों से क्या लेकर निकलता है। फिलहाल के लिए, खाड़ी देशों ने पाकिस्तान को 'ब्लैकआउट' होने से बचा लिया है।


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