सऊदी अरब पर हमला तो पाकिस्तान देगा जवाब: शहबाज शरीफ का बड़ा एलान

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के उन्माद और ईरान के मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच पाकिस्तान ने एक बड़ा कूटनीतिक और सैन्य स्टैंड लिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने साफ कर दिया है कि 'चाहे कुछ भी हो जाए', पाकिस्तान हर हाल में सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए खड़ा रहेगा।

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल सितंबर में हुए रक्षा समझौते ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर पहुँचा दिया है। इस डील की सबसे अहम शर्त यह है: "दोनों देशों में से किसी भी एक देश पर होने वाला हमला, दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।" इसी समझौते के तहत मुशर्रफ जैदी ने ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में दोहराया कि इस्लामाबाद और रियाद की सुरक्षा साझेदारी दशकों पुरानी है और अब यह पहले से कहीं अधिक मजबूत है।

ईरान के हमलों से बढ़ा तनाव

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। अमेरिका और इज़रायल की जवाबी कार्रवाई ने पूरे इलाके को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान इस संघर्ष को रोकने के लिए राजनयिक (Diplomatic) स्तर पर भी सक्रिय है, ताकि युद्ध को पूरे क्षेत्र में फैलने से रोका जा सके।

ऊर्जा संकट और सऊदी का साथ

मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार (Global Energy Market) में आग लगी हुई है। ईंधन की बढ़ती कीमतों ने पाकिस्तान जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। इस संकट की घड़ी में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तेल और डीजल की सप्लाई सुनिश्चित करने का वादा किया है। यह सहयोग न केवल सैन्य है, बल्कि पाकिस्तान की डगमगाती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

वैश्विक प्रभाव और कूटनीति

पाकिस्तान का यह रुख साफ करता है कि वह खाड़ी क्षेत्र में सऊदी अरब को अपना सबसे भरोसेमंद सहयोगी मानता है। जैदी के अनुसार, डिफेंस एग्रीमेंट से पहले भी दोनों देश "एक-दूसरे के लिए मौजूद रहने" के सिद्धांत पर चलते आए हैं। अब बढ़ती क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच यह साझेदारी मिडिल ईस्ट की सुरक्षा का एक नया ध्रुव बन सकती है।

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