नक्सल प्रभावित मनातू में पुलिस की पाठशाला बनी उम्मीद की किरण
पलामू : मनातू के नक्सल प्रभावित इलाके में पुलिस की एक अनोखी पहल ने शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत थाना परिसर में चलाए जा रहे निशुल्क कोचिंग केंद्र का परिणाम इस वर्ष बेहद उत्साहजनक रहा। यहां पढ़ने वाले सभी 25 छात्र-छात्राओं ने इंटरमीडिएट परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली है। इस सफलता के बाद पूरे इलाके में खुशी का माहौल है और पुलिस की इस पहल की जमकर सराहना हो रही है।
जानकारी के अनुसार,मनातू थाना के तत्कालीन प्रभारी निर्मल उरांव ने स्वयं समय निकालकर 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य शुरू किया था। थाना परिसर में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित होती थीं, जिसमें आसपास के गांवों के गरीब और जरूरतमंद छात्र-छात्राएं भाग लेते थे। अधिकांश विद्यार्थी मजदूर और किसान परिवारों से आते हैं, जिनके लिए निजी कोचिंग की व्यवस्था कर पाना संभव नहीं था। कोचिंग से पढ़ाई करने वाली छात्रा रेशमी कुमारी ने साइंस स्ट्रीम में 70 प्रतिशत अंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। रेशमी ने बताया कि उनके पिता मजदूरी करते हैं और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बेहतर शिक्षा प्राप्त करना कठिन था। थाना परिसर में मिलने वाली निशुल्क कोचिंग और निर्मल उरांव के मार्गदर्शन से उन्हें पढ़ाई में काफी मदद मिली। उन्होंने कहा कि यहां अनुशासन के साथ पढ़ाई का माहौल मिलता था, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा और अच्छे अंक लाने में सफलता मिली। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बन रही है। जहां पहले पुलिस और ग्रामीणों के बीच दूरी महसूस की जाती थी, वहीं अब शिक्षा के माध्यम से विश्वास और सहयोग का रिश्ता मजबूत हो रहा है। लोगों का कहना है कि पुलिस अब केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि समाज के विकास और बच्चों के भविष्य निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने बताया कि निर्मल उरांव ने थाना परिसर के अलावा आसपास के स्कूलों में भी जाकर बच्चों को घंटीवार पढ़ाने का कार्य किया। इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी और अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत हुआ। इलाके के बुद्धिजीवियों ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि यदि इसी तरह शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा मिलता रहा तो आने वाले समय में क्षेत्र के कई बच्चे बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सकेंगे। इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर सकारात्मक पहल करें तो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी शिक्षा के जरिए बदलाव की नई कहानी लिखी जा सकती है।
रिपोर्टर - सत्येंद्र कुमार विश्वकर्मा

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