श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिवस सुदामा चरित्र ने भिगोए श्रद्धालुओं के नयन
पन्ना - जगत जननी मातेश्वरी मां कलेही की पावन-पवित्र धार्मिक नगरी में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा के छठवें दिवस भक्ति,करुणा और निष्काम प्रेम की अविरल धारा प्रवाहित हुई इस अवसर पर श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र,राजा नृग की कथा, गौदान का महत्व तथा युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ जैसे प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं अलौकिक वर्णन किया गया यह धार्मिक आयोजन रिटायर्ड शिक्षक नागेंद्र श्रीवास्तव एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रजनी श्रीवास्तव,शिक्षक तथा समस्त श्रीवास्तव परिवार के संयोजन में सात बगले निज निवास परिसर में श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हो रहा है शिवधाम पवई से पधारे ख्यातिलब्ध भागवताचार्य पं. श्री रमेश कृष्ण शास्त्री महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर सुदामा चरित्र तक का सजीव चित्रण किया,जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे कथा के दौरान पंडाल बार-बार “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा भागवताचार्य ने राजा नृग की कथा के माध्यम से दान,कर्मफल और प्रभु कृपा का गूढ़ संदेश देते हुए बताया कि दान सद्भाव और विवेक के साथ होना चाहिए सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रसंग श्रीकृष्ण और सुदामा के निष्काम मित्रत्व का जीवंत उदाहरण है,जहां प्रभु ने निर्धन सुदामा को गले लगाकर यह सिद्ध कर दिया कि भगवान केवल भाव के भूखे होते हैं,धन के नहीं उन्होंने गौदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत में गौदान को सर्वोच्च दान माना गया है, जो मानव जीवन को पुण्य और मोक्ष की ओर ले जाता है वहीं युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस यज्ञ में भगवान श्रीकृष्ण को अग्र पूजा प्रदान की गई,जो उनके सर्वश्रेष्ठ और सर्वोपरि स्वरूप को दर्शाता है भागवताचार्य पं. श्री रमेश कृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन में मानसिक शांति,आत्मिक शुद्धि और सदाचार का संचार करता है यह कथा भयमुक्त होकर प्रभु भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और अंततः मोक्ष का द्वार खोलती है कथा के दौरान प्रतिदिन भगवान की आकषर्क झांकियां प्रस्तुत की जा रही जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र बनीं हुई है कथा स्थल का वातावरण पूर्णतः सात्त्विक,भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा बड़ी संख्या में श्रद्धालु,मातृशक्ति एवं कृष्ण भक्त दूर-दराज से पहुंचकर कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
संवाददाता - सुरेश कुमार द्विवेदी


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