उप जेल पवई जैन समाज की पूज्य माता जी के हुए प्रवचन और दर्शन

पवई : तप, त्याग और करुणा का अद्भुत संगम: पवई नगर गौरव परम् पूज्य श्रमणी आर्यिका 105 विजिज्ञासा श्री माता जी ससंघ के मंगल प्रवचनों से पवई उप-जेल में जागा आत्मचेतना का प्रकाश 


आज पवई उप-जेल प्रांगण एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना, जब पवई नगर गौरव परम् पूज्य श्रमणी आर्यिका 105 विजिज्ञासा श्री माता जी ससंघ ने अपने मंगल प्रवचनों द्वारा सैकड़ों बंदियों के अंतर्मन को स्पर्श किया। जेल की सीमाओं के भीतर आज धर्म, संयम और आत्मजागरण की दिव्य धारा प्रवाहित होती दिखाई दी।
पूज्य माताजी वर्तमान में पवई प्रवास पर एक दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम एवं अनुष्ठान हेतु विराजमान हैं। इसी पावन अवसर के मध्य आज पवई अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम मैडम) एवं पवई जेल अधीक्षक श्री मिश्रा जी के विशेष आग्रह पर पूज्य माता जी ससंघ का जेल प्रांगण में मंगल प्रवेश हुआ और वहीं मंगल प्रवचन सम्पन्न हुए।
दोपहर 2:00 बजे सकल दिगम्बर जैन समाज पवई के साथ जैन मंदिर से पूज्य माताजी ससंघ का मंगल प्रस्थान हुआ तथा दोपहर 3:30 बजे जेल परिसर में कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। सर्वप्रथम माननीय जेल अधीक्षक श्री मिश्रा जी एवं एसडीएम मैडम द्वारा पूज्य माताजी का श्रद्धाभाव से चरण प्रक्षालन कर अभिनंदन किया गया। तत्पश्चात जेलर साहब द्वारा संपूर्ण जेल का भ्रमण कराते हुए व्यवस्थाओं से अवगत कराया गया।
जेल प्रांगण में सैकड़ों से अधिक बंदियों ने अत्यंत एकाग्रता एवं श्रद्धा के साथ पूज्य माताजी के मंगल प्रवचनों का श्रवण किया। अपने करुणामय संबोधन में माताजी ने भगवान सर्वज्ञ प्रभु श्री रामचंद्र जी के वनवास का प्रेरक दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए कहा—
“वनवास केवल दंड नहीं, बल्कि धैर्य, मर्यादा और आत्मबल की परीक्षा है। जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियाँ हमें तोड़ने नहीं, बल्कि गढ़ने आती हैं। यदि मनुष्य पश्चाताप और संकल्प के साथ स्वयं को बदलने का निश्चय करे, तो वही स्थान साधना-स्थली बन सकता है।”
माताजी ने बंदियों को आत्मपरिवर्तन का संदेश देते हुए कहा—
“जेल की दीवारें शरीर को सीमित कर सकती हैं, किंतु आत्मा को नहीं। आत्मा अनंत शक्तियों का भंडार है। यदि अंतर्मन में जागृति आ जाए, तो जीवन की दिशा बदल सकती है। आज का क्षण आपके जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत बन सकता है।”
उनके वचनों से संपूर्ण वातावरण भाव-विभोर हो उठा। अनेक बंदियों की आँखों में पश्चाताप और नवजीवन की आशा के भाव स्पष्ट झलकते दिखाई दिए।
इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज पवई के अध्यक्ष श्री विनोद कुमार जी, उपाध्यक्ष श्री महेंद्र कुमार जी, गौशाला अध्यक्ष श्री नितिन कुमार जी, श्री सुनील कुमार जी, श्री संतोष कुमार जी, पत्रकार श्री दिनेश कुमार जी, श्री अमित कुमार जी, सचिन जैन, लकी, अनुंजय जैन, अर्पित जैन, विपिन जैन सहित समस्त महिला मंडल, युवा मंडल एवं अनेकों समाजजन श्रद्धाभाव से उपस्थित रहे और पूज्य माताजी के मंगल प्रवचनों का श्रवण किया।
कार्यक्रम के अंत में जेल अधीक्षक श्री मिश्रा जी ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक प्रवचन बंदियों के मानसिक, नैतिक एवं सामाजिक पुनर्वास में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने पूज्य माता जी के चरणों में वंदन निवेदित कर पुनः मंगल आगमन का विनम्र निवेदन किया।
आज का यह दिव्य आयोजन पवई नगर के लिए गौरव का विषय बन गया, जब तप, त्याग और करुणा की मूर्ति परम् पूज्य श्रमणी आर्यिका 105 विजिज्ञासा श्री माता जी सत्संग के मंगल प्रवचनों से जेल की दीवारों के भीतर भी आत्मजागरण का दीप प्रज्वलित हुआ।

रिपोर्टर : सुरेश कुमार द्विवेदी

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