42 वर्षों तक ज्ञान की गंगा बहाने वाले गुरु का हुआ भव्य विदाई, समारोह तालियों की गूंज से सराबोर हुआ विद्यालय परिसर
पवई : चार दशक से अधिक समय तक शिक्षा की लौ जलाकर हजारों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा देने वाले शासकीय माध्यमिक शाला नरगी के वरिष्ठ उच्च श्रेणी शिक्षक महेश प्रसाद शर्मा मंगलवार को 42 वर्षों की निष्कलंक एवं गौरवपूर्ण शासकीय सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो गए इस अवसर पर विद्यालय परिसर भावनाओं,सम्मान और आत्मीयता से सराबोर हो उठा विदाई समारोह में उपस्थित जनसमूह ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अपने प्रिय शिक्षक को सम्मानपूर्वक विदा किया
विद्यालय में आयोजित गरिमामय समारोह के मुख्य अतिथि पंडित रामदुलारे पाठक एवं विशिष्ट अतिथि किशोरी लाल उपाध्याय ने कहा कि श्री शर्मा ने अपने पूरे सेवाकाल में शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा,बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, अनुशासन,संस्कार और नैतिक मूल्यों के विकास को अपनी प्राथमिकता बनाया उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को ज्ञान की रोशनी देकर समाज को जागरूक, शिक्षित और जिम्मेदार नागरिक प्रदान किए उनका समर्पण,सादगी और कर्मनिष्ठा सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी समारोह में श्री महेश प्रसाद शर्मा का शॉल,श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर भव्य सम्मान किया गया वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक का मूल्य उसकी सेवा अवधि से नहीं, बल्कि उन अनगिनत जीवनों से आंका जाता है जिन्हें वह अपनी शिक्षा और संस्कारों से संवारता है श्री शर्मा का पूरा सेवाकाल इसी आदर्श का जीवंत उदाहरण रहा
अपने विदाई उद्बोधन में भावुक हुए महेश प्रसाद शर्मा ने विभाग,सहकर्मियों, विद्यार्थियों,अभिभावकों एवं क्षेत्रवासियों के स्नेह और सहयोग के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया उन्होंने कहा कि शिक्षक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने विद्यार्थियों को सफल,संस्कारित और समाज के प्रति उत्तरदायी बनते देखना है यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी और जीवन का वास्तविक सम्मान है
इस अवसर पर रामभुवन बागरी,राम भगत द्विवेदी, सखाराम पांडेय,हजारी लाल पटेल,कन्या शाला प्राचार्य रामचरण गुप्ता, पुरुषोत्तम लाल शर्मा, रामेश्वरी शर्मा,इंद्रभान बागरी सहित विद्यालय परिवार, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे समारोह का समापन भावभीने माहौल में हुआ, जहां सभी ने महेश प्रसाद शर्मा के स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए उन्हें नई जीवन यात्रा के लिए शुभकामनाओं के साथ विदाई दी एक शिक्षक सेवा से सेवानिवृत्त हो सकता है, लेकिन उसके द्वारा दिए गए ज्ञान,संस्कार और प्रेरणा कभी सेवानिवृत्त नहीं होते महेश प्रसाद शर्मा की 42 वर्षों की तपस्या आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणापुंज बनी रहेगी।
रिपोर्टर : सुरेश संगम द्विवेदी
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