आजादी के 80 साल बाद भी रेल सुविधा से वंचित पवई, चुनावी वादों में उलझी रेल लाइन की मांग

पवई (पन्ना) : देशभर में रेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है, वहीं मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की पवई तहसील आजादी के लगभग 80 साल बाद भी रेल सुविधा से वंचित है। क्षेत्रवासी दशकों से पवई को रेल मार्ग से जोड़ने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों को सैकड़ों ज्ञापन सौंपने के बावजूद यह मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। हर चुनाव में रेल सुविधा का मुद्दा उठता है, लेकिन चुनाव के बाद यह मांग फिर ठंडे बस्ते में चली जाती है।

वर्तमान में खजुराहो-पन्ना-नागौद-देवेंद्रनगर-सतना रेल लाइन का कार्य प्रगति पर होने की जानकारी के बीच पवई को रेल मानचित्र में शामिल नहीं किए जाने से क्षेत्रवासियों में नाराजगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि दमोह से पटेरा, कुंडलपुर और पवई होते हुए सतना अथवा कटनी से पन्ना-खजुराहो तक वाया पवई रेल लाइन के विकल्पों का सर्वे कराया जाए, तो क्षेत्र को कम खर्च में बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिल सकती है।

पवई विधानसभा क्षेत्र में स्थित सिद्ध माता कलेही मंदिर, हनुमान भाटे सहित गुनौर क्षेत्र के चौमुखनाथ और सिद्धनाथ धाम जैसे धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच भी आसान हो सकती है। रेल सुविधा मिलने से पवई के साथ शाहनगर, गुनौर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को आवागमन, व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

पलायन रोकने में मिल सकती है मदद

क्षेत्र में रेल सुविधा का अभाव विकास की राह में बड़ी बाधा माना जा रहा है। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण हजारों परिवारों को काम की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है। नागरिकों का मानना है कि रेल कनेक्टिविटी मिलने से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब खजुराहो से पन्ना तक रेल लाइन का सपना साकार हो रहा है, तो पवई को इस सुविधा से क्यों वंचित रखा जा रहा है? 

क्षेत्रवासियों ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से मांग की है कि पवई को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए जल्द सर्वे कराया जाए और दमोह, सतना तथा कटनी से पन्ना तक वाया पवई रेल लाइन की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाए।

अब देखना यह है कि दशकों से रेल सुविधा का इंतजार कर रहे पवई क्षेत्र के लोगों की मांग कब पूरी होती है और उनका रेल से जुड़ने का सपना कब साकार होता है।

संवाददाता : सुरेश संगम द्विवेदी 

 

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