चार माह से मानदेय अटका, रसोइया बहनों और समूह संचालकों पर गहराया आर्थिक संकट

पन्ना : पीएम पोषण/ सांझा चूल्हा योजना के अंतर्गत शासकीय स्कूलों में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाली रसोइया बहनों और समूह संचालकों का पारिश्रमिक एवं सामग्री की राशि पिछले चार माह से लंबित है। जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर का भुगतान नहीं होने से योजना से जुड़ी महिलाओं के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था संचालित करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ की पन्ना जिला अध्यक्ष रचना,राजू तिवारी ने बताया कि लंबित भुगतान के संबंध में मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव तथा पन्ना कलेक्टर को पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराया गया है। इसके अलावा भोपाल पहुंचकर आंदोलन भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

घर का अनाज बेचकर बच्चों के लिए बनाया भोजन

मध्यान्ह भोजन व्यवस्था का संचालन करने वाले अधिकांश समूहों से जुड़ी महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। उन्हें उम्मीद थी कि योजना के माध्यम से मिलने वाले पारिश्रमिक और समूह संचालन की राशि से उनके परिवार का भरण-पोषण हो सकेगा। लेकिन चार माह से भुगतान नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

समूह संचालकों और रसोइया बहनों का कहना है कि बच्चों के लिए नियमित भोजन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें अपने घर की खाद्यान्न सामग्री तक इस्तेमाल करनी पड़ी। वहीं, भुगतान में देरी के कारण बाजार में उधारी बढ़ गई है। समय पर रकम नहीं चुका पाने से व्यापारियों के बीच उनकी साख भी प्रभावित हो रही है और अब दुकानदार उधार पर सामग्री देने से कतरा रहे हैं।

परिवार चलाएं या बच्चों के भोजन की व्यवस्था करें?

रसोइया बहनों और समूह संचालकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे अपने परिवार की जरूरतें पूरी करें या स्कूलों में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित करें। एक ओर घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें हैं, तो दूसरी ओर स्कूलों में भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी है।
योजना से जुड़ी महिलाओं को उम्मीद थी कि नियमित भुगतान से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। लेकिन भुगतान लंबित रहने से उनकी परेशानियां कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। आर्थिक तंगी के चलते कई परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है।
अब संगठन को मजबूरन 11 नवंबर को पूरे प्रदेश में हाइवे जाम करना पड़ेगा 

आंदोलन के बाद भी समाधान का इंतजार

प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ की जिला अध्यक्ष रचना,राजू तिवारी के अनुसार, मुख्यमंत्री से लेकर विभागीय प्रमुख सचिव और जिला प्रशासन तक समस्या पहुंचाने के साथ भोपाल में आंदोलन भी किया गया, लेकिन भुगतान की समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

अब रसोइया बहनों और समूह संचालकों को लंबित पारिश्रमिक एवं सामग्री की राशि जारी होने का इंतजार है। उनका कहना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

भुगतान में देरी से मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पर भी असर की आशंका
पीएम पोषण/सांझा चूल्हा योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली रसोइया बहनों और समूह संचालकों को समय पर भुगतान मिलना आवश्यक है। चार माह से राशि लंबित रहने की स्थिति में भोजन व्यवस्था के सुचारू संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग लंबित भुगतान को लेकर कब तक निर्णय लेगा और आर्थिक संकट से जूझ रही रसोइया बहनों एवं समूह संचालकों को उनका बकाया कब मिलेगा? महिलाओं को उम्मीद है कि शासन और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द भुगतान सुनिश्चित करेंगे, ताकि उन्हें राहत मिल सके और स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था निर्बाध रूप से संचालित होती रहे।

संवाददाता : सुरेश संगम द्विवेदी 

 

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