माथे पर पट्टी, हाथ में लाठी... संसद में पप्पू यादव का बड़ा विरोध
संसद के मानसून सत्र में आज का दिन बेहद अहम रहा। एक तरफ देशभर के करोड़ों छात्रों से जुड़ा एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा में चर्चा के लिए तैयार रहा...तो दूसरी तरफ संसद के बाहर और अंदर छात्रों के आंदोलन की गूंज अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही। लेकिन इन सबके बीच संसद परिसर में एक ऐसी एंट्री हुई...जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जी हां पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव माथे पर मेडिकल प्लास्टर...हाथ में लाठी...और घायल अंदाज में संसद पहुंचे। उनका यह रूप कोई दुर्घटना नहीं...बल्कि एक विरोध था। उनका कहना था कि यह उन छात्रों की चोट का प्रतीक है...जिन पर जंतर-मंतर से लेकर बिहार और दिल्ली तक पुलिस ने लाठीचार्ज किया। देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट...
संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए पप्पू यादव ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर करारा हमला बोला। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा AK-47 की तरह गोली चलाई जा रही है, डंडे बरसाए जा रहे हैं। आखिर प्रदर्शन करने का रास्ता क्या बचा है?
इतना ही नहीं, पप्पू यादव ने मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को 'मिथिला पाग' पहनाए जाने से मिथिला की सम्मानित परंपरा और गरिमा को ठेस पहुंची है। उन्होंने साफ किया कि उनका यह विरोध प्रदर्शन छात्रों पर हुए हमले और बिहार समेत देशभर में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के खिलाफ एक सख्त संदेश है। आपको बता दें पिछले एक सप्ताह से NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में लगातार हंगामा और गतिरोध बना हुआ था। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की लगातार कोशिशों के बाद अब सदन की कार्यवाही पटरी पर लौटती दिख रही है।
ओम बिरला ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम फ्लोर लीडर्स के साथ कई दौर की बैठकें कीं। उनकी मध्यस्थता के बाद सभी राजनीतिक दल आज मंगलवार को एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के लिए राजी हो गए हैं। दरअसल, सोमवार को ही सरकार इस अहम संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू कराना चाहती थी, लेकिन विपक्ष के भारी हंगामे के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आयोजित 'चलो संसद' मार्च और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सदन में जबरदस्त हंगामा किया। विपक्ष लगातार सरकार से छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर आधिकारिक बयान देने की मांग करता रहा। सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई, जिसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही स्थगित कर सरकार और विपक्ष को आपसी मतभेद सुलझाने के लिए तीन घंटे का वक्त दिया था।
आपको बता दें सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में यह संशोधन विधेयक पेश किया। यह संशोधन पब्लिक एग्जामिनेशंस अधिनियम, 2024 को और अधिक सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
सरकार का दावा है कि इस नए संशोधन के पारित होने के बाद संगठित गिरोहों द्वारा की जाने वाली परीक्षा धांधली पर पूर्ण अंकुश लगेगा। पेपर लीक करने वालों और इसमें शामिल कोचिंग व परीक्षा माफियाओं के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर कानूनी व वित्तीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष का कहना है कि केवल कानून सख्त बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी। विपक्ष का आरोप है कि जब तक पेपर लीक कराने वाले बड़े नेटवर्क...प्रशासनिक मिलीभगत...और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी...तब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा। यही वजह है कि पिछले कई दिनों से संसद के भीतर और बाहर पेपर लीक का मुद्दा लगातार गर्माया हुआ है।
जाहिर है देशभर के करोड़ों छात्र लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में संसद में पेश किया गया एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार इसे परीक्षा माफिया पर निर्णायक प्रहार बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि कानून के साथ-साथ जवाबदेही और निष्पक्ष कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है। इसी बीच घायल अंदाज में संसद पहुंचे पप्पू यादव ने एक बार फिर छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें संसद की कार्यवाही पर हैं। देश के करोड़ों छात्र और अभ्यर्थी अब संसद से ठोस संदेश और प्रभावी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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