फ्रांस के कृषि मेले में पहली बार गायों की जगह अन्य जानवर होंगे
फ्रांस की राजधानी पेरिस में हर साल होने वाला यूरोप का सबसे बड़ा कृषि मेला, इंटरनेशनल एग्रीकल्चर शो (SIA), इस साल एक ऐतिहासिक बदलाव के साथ होगा। पहली बार 1964 से चल रहे इस मेले में गायों को शामिल नहीं किया जाएगा।
आयोजकों ने मंगलवार को बताया कि गायों में फैल रही लम्पी स्किन डिजीज के खतरे के कारण यह कदम उठाया गया है। मेले में आमतौर पर 500 से 600 गायें आती थीं और बच्चों व शहरवासियों के लिए यह मुख्य आकर्षण होती थीं। इस साल गायों के बजाय अन्य जानवर जैसे सूअर, भेड़, घोड़े, कुत्ते और बिल्लियां दिखाई जाएंगी। SIA के चेयरमैन जेरोम डेस्पे ने कहा कि यह फैसला कल रात लिया गया। उन्होंने माना कि यह ऐतिहासिक लेकिन दुखद निर्णय है।
लम्पी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गायों और भैंसों को प्रभावित करती है। यह मच्छर और मक्खियों जैसे काटने वाले कीड़ों से फैलती है। संक्रमित गायों को बुखार होता है, त्वचा पर गांठें पड़ती हैं और दूध उत्पादन कम हो जाता है। हालांकि यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती।
फ्रांस में जून 2025 से यह बीमारी फैल रही है और अब तक 100 से अधिक मामले सामने आए हैं। सरकार ने बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन अभियान चलाया है। कानून के अनुसार यदि कोई भी गाय संक्रमित पाई जाती है, तो पूरी झुंड को मारना पड़ता है। इस कारण किसान इस नीति को कठोर और अनावश्यक मान रहे हैं। कई किसान गायें मेले में लाने से मना कर रहे हैं, जबकि कुछ प्रभावित किसानों के समर्थन में एकजुटता दिखाना चाहते हैं। पिछले हफ्ते पेरिस में किसानों ने ट्रैक्टर रैली कर सरकार की नीति का विरोध किया।
मेले के निदेशक अर्नॉड लेमोइन ने कहा कि उम्मीद है कि विरोध प्रदर्शन मेले तक नहीं पहुंचेगा। इस साल मेले का मस्कट (प्रतीक) गाय की जगह अन्य जानवर होंगे। इस फैसले ने फ्रांस के कृषि क्षेत्र में चल रहे तनाव को भी उजागर किया है, जहां बीमारी के अलावा EU-Mercosur व्यापार समझौते जैसी समस्याएं भी हैं।

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