543 नहीं अब होंगे 850 सांसद! अमित शाह के एक बयान ने पलटी पूरी बाजी!
आज 16 अप्रैल 2026 की तारीख इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों के साथ-साथ तीखी बहस के लिए भी दर्ज हो गई है। दिल्ली की संसद से आज वो हुंकार उठी है, जिसकी गूंज कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक सुनाई दे रही है। मोदी सरकार ने वो मास्टरस्ट्रोक चल दिया है, जिसने विपक्ष के खेमे में खलबली मचा दी है। आज संसद में एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन ऐसे बड़े संविधान संशोधन विधेयक पेश हुए, जो न सिर्फ देश की लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 कर देंगे, बल्कि 2029 के रण में 273 महिला सांसदों की एंट्री का रास्ता भी साफ कर देंगे। लेकिन रुकिए! यह राह इतनी आसान नहीं है। एक तरफ नारी शक्ति का नारा है, तो दूसरी तरफ दक्षिण बनाम उत्तर का नया विवाद और मुस्लिम कोटे पर अमित शाह का कड़ा प्रहार। चलिए जानते हैं आज संसद के गलियारों में क्या-क्या हुआ और कैसे बदला भारत का सियासी नक्शा!
आज गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में मोदी सरकार ने अपनी रणनीति के पत्ते खोल दिए। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और गृह मंत्री अमित शाह ने मिलकर वो तीन विधेयक पेश किए, जो आने वाले दशकों की राजनीति तय करेंगे।
पहला 131वां संशोधन विधेयक
इसके जरिए जनसंख्या की नई परिभाषा गढ़ी गई है और संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का संवैधानिक आधार तैयार किया गया है।
परिसीमन विधेयक 2026
यह सबसे बड़ा बदलाव है। इसके तहत लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव पेश हुआ। राज्यों के हिस्से में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें होंगी।
केंद्र शासित प्रदेश कानून विधेयक
इसके तहत दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य कर दिया गया है।
दरअसल, जैसे ही विधेयक पेश हुए, सदन में विपक्ष ने संविधान हाईजैक के नारे लगाने शुरू कर दिए। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। लेकिन सबसे तीखी नोकझोंक तब हुई जब समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव और अखिलेश यादव ने मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटे की मांग उठाई। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो टूक कहा "समाजवादी पार्टी अपनी सारी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कोई आपत्ति नहीं है।
आपको बता दें सरकार का प्लान है कि किसी भी राज्य की सीट कम न हो, बल्कि सबकी सीटें बढ़ा दी जाएं। 2011 की जनगणना को आधार बनाकर जो अनुमान सामने आए हैं, वो चौंकाने वाले हैं:
उत्तर प्रदेश: 80 से बढ़कर 120-140 सीटें।
बिहार: 40 से बढ़कर 73 सीटें तक।
महाराष्ट्र: 48 से बढ़कर 79 सीटें।
पश्चिम बंगाल: 42 से बढ़कर 64 सीटें।
तमिलनाडु 60, केरल 30 और कर्नाटक में भी सीटों की संख्या में बड़ी बढ़ोत्तरी प्रस्तावित है।
दरअसल, यह विधेयक सिर्फ एक कानून नहीं है, बल्कि 2029 के आम चुनाव की लॉन्चिंग पैड है। अगर यह पास होता है, तो भारत दुनिया का ऐसा देश बन जाएगा जहाँ संसद की एक-तिहाई सीटों पर सिर्फ महिलाएं काबिज होंगी। परिसीमन आयोग जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के जज की अध्यक्षता में बनेगा, जो 2011 के आंकड़ों पर नई सीमाएं तय करेगा। वहीं राहुल गांधी ने इस कदम को सत्ता कब्जाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी क्षेत्रों में हेरफेर के जरिए पिछड़ों और छोटे राज्यों का हक मारना चाहती है।
वहीं, दक्षिण भारत के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और रेवंत रेड्डी ने चेतावनी दी कि अगर जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों की ताकत कम हुई, तो यह संघीय ढांचे पर बड़ा हमला होगा। वहीं जहाँ पूरा विपक्ष एकजुट होकर विरोध कर रहा है, वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने इन विधेयकों का स्वागत कर सबको चौंका दिया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक बताया, हालांकि उन्होंने भी SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग कोटे और आरक्षण को 50% तक बढ़ाने की मांग रखी।
कुल मिलाकर देखा जाए तो संसद में आज जो चिंगारी उठी है, वो जल्दी शांत होने वाली नहीं है। सरकार इसे नारी वंदन और बेहतर प्रतिनिधित्व कह रही है, तो विपक्ष इसे चुनावी स्टंट और दक्षिण भारत के खिलाफ साजिश बता रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या 850 सांसदों वाली लोकसभा भारत की समस्याओं का समाधान करेगी? क्या 2029 में भारत की संसद वाकई बदली-बदली नजर आएगी? अमित शाह की दो टूक और विपक्ष की घेराबंदी के बीच, आज लोकतंत्र के इस नए मंदिर में इतिहास लिखा जा चुका है।


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