मॉनसून सत्र हंगामे की भेंट, लोकसभा में सिर्फ 19% काम; 12 बिल पास, 11 बिना चर्चा के पारित

संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को भारी हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और नारेबाजी देखने को मिली। कई मौकों पर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सत्र खत्म होने के बाद संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार की ओर से सदन के कामकाज का आंकड़ा सामने रखा।

किरेन रिजिजू ने बताया कि मॉनसून सत्र के दौरान कुल 12 विधेयक पारित किए गए। हालांकि, चर्चा और बहस के लिहाज से सत्र अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। उनके मुताबिक, लोकसभा में निर्धारित समय का सिर्फ 19 फीसदी ही उपयोग हो पाया, जबकि राज्यसभा में करीब 39 फीसदी काम हुआ। रिजिजू ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी सांसदों ने चर्चा के बजाय नारेबाजी और हंगामे का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में बहस और चर्चा बेहद महत्वपूर्ण है और सदस्यों को सदन में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

संसदीय कार्यमंत्री के मुताबिक, पूरे मॉनसून सत्र के दौरान सिर्फ एक विधेयक पर व्यापक चर्चा हो सकी। यह विधेयक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़ा था। इसी मुद्दे से संबंधित एंटी-पेपर लीक कानून को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में चर्चा के बाद पारित किया गया। बताया गया कि 12 विधेयकों में से 11 विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के पारित हुए। विपक्ष का आरोप रहा कि सरकार ने हंगामे के बीच विधेयकों को जल्दबाजी में पारित कराया, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष ने सदन को सुचारू रूप से चलने नहीं दिया। मॉनसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा में कुल निर्धारित कामकाज की तुलना में केवल करीब 19 घंटे ही काम हो पाया। बताया गया कि लोकसभा के लिए करीब 108 घंटे का काम निर्धारित था।

इस हिसाब से देखें तो पूरे सत्र के दौरान लोकसभा औसतन करीब 60 मिनट प्रतिदिन ही प्रभावी रूप से चल सकी। लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाई। सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को भी लोकसभा का माहौल शांत नहीं रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी सांसदों की नारेबाजी शुरू हो गई। सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपना पारंपरिक संबोधन भी नहीं दे सके। गृह मंत्री अमित शाह के संसद पहुंचते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष की ओर से “माफी मांगो” और “लाठी किसने चलाया?” जैसे नारे लगाए गए। इसके जवाब में सत्ता पक्ष के सांसद भी हंगामा करने लगे।

स्थिति को देखते हुए अमित शाह ने सत्ता पक्ष के सांसदों को शांत रहने और बैठने का इशारा किया। इसके बाद NDA सांसद शांत होकर अपनी सीटों पर बैठ गए, जबकि विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे। कुछ देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद वंदे मातरम् का गान हुआ और इसके साथ ही लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

मॉनसून सत्र की समाप्ति के साथ ही सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। सरकार का कहना है कि हंगामे के बावजूद 12 विधेयकों का पारित होना कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि बिना पर्याप्त चर्चा के विधेयकों को पारित करना संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करता है। अब मॉनसून सत्र खत्म हो चुका है, लेकिन जिस तरह से पूरे सत्र में हंगामा, नारेबाजी और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला, उससे साफ है कि संसद की अगली बैठक में भी कई मुद्दों पर सियासी घमासान जारी रहने की संभावना है।

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