पटना में छात्रों का बवाल! मुख्यमंत्री आवास घेरने निकले हजारों अभ्यर्थी

बिहार की राजधानी पटना आज मंगलवार को गोलबंद छात्रों के जोरदार नारों और पुलिस की सख्त बैरिकेडिंग से दहल उठी! भर्ती परीक्षाओं में धांधली रोकने, निगेटिव मार्किंग खत्म करने और एकल परीक्षा लागू करने जैसी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों अभ्यर्थियों का सब्र अब जवाब दे चुका है। गर्दनीबाग में चल रहा शांत 'न्याय सत्याग्रह' जब सरकार के कानों तक नहीं पहुंचा, तो छात्रों ने सीधे मुख्यमंत्री आवास के घेराव का बिगुल फूंक दिया। गांधी मैदान से शुरू हुआ यह मार्च जेपी गोलंबर पर पहुंचते-पहुंचते एक बड़े टकराव में बदल गया, जहां गुस्साए छात्रों ने पुलिसिया रुकावटों को ध्वस्त कर दिया और डाकबंगला चौराहे की तरफ तेजी से कदम बढ़ा दिए।

दरअसल, पटना की सड़कों पर आज छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है...सरकार के खिलाफ नारे, हाथों में झंडे, सड़क पर हजारों की भीड़ और मुख्यमंत्री आवास की तरफ बढ़ता छात्रों का काफिला...राजधानी पटना में टीआरई-4 के अभ्यर्थियों का आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है। छात्रों ने साफ कर दिया है कि सिर्फ आश्वासन से बात नहीं बनेगी...जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन पीछे हटने वाला नहीं है। गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास के घेराव के लिए निकले छात्रों को पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। 

हालात उस वक्त और गरमा गए, जब छात्रों ने पहली बैरिकेडिंग पार कर ली और दूसरी बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए हल्का बल का प्रयोग किया। लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर दिखे। आपको बता दें छात्रों का गुस्सा सिर्फ एक मांग को लेकर नहीं है...TRE-4 में पद बढ़ाने से लेकर एकल परीक्षा लागू करने, निगेटिव मार्किंग खत्म करने, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और कई दूसरी मांगों को लेकर अभ्यर्थी सड़क पर हैं। वहीं अगर छात्रों की मांगों की बात करें तो, छात्रों का कहना है कि.....

एकल परीक्षा का आयोजन हो और परीक्षा से निगेटिव मार्किंग पूरी तरह हटाई जाए।

TRE-4 में खाली पदों की संख्या बढ़ाई जाए।

दरोगा, सिपाही और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए

हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के साथ हो रहे भेदभाव को तुरंत खत्म किया जाए।

BSSC में संविदा वेटेज को हटाना, LET व BET का आयोजन कराना और BPSC परीक्षा की तिथि को तय करना चाहिए। 

आपको बता दें सोमवार को शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों और छात्र नेताओं के बीच करीब दो घंटे तक मैराथन बैठक हुई थी। हालांकि, विभाग की ओर से कुछ बातों पर आश्वासन तो मिला, लेकिन अभ्यर्थियों की मुख्य मांगों पर पक्की सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद छात्र नेता सौरभ सिंह ने गर्दनीबाग धरना स्थल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ ऐलान कर दिया था कि आंदोलन वापस नहीं होगा। बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष दिलीप कुमार ने दो टूक चेतावनी दी है कि वे पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को रख रहे हैं। अगर सरकार ने जल्द ही इन सभी मांगों पर कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में पूरा 'बिहार बंद' किया जाएगा। फिलहाल, पटना की सड़कें संग्राम का मैदान बनी हुई हैं और छात्रों का साफ कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री से सीधी बातचीत या ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटने वाले! ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पटना में छात्रों और सरकार के बीच सीधा टकराव होगा? 

फिलहाल पटना में छात्रों का गुस्सा सड़कों पर है...बैरिकेडिंग टूटी है, नारेबाजी तेज है और पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। छात्र कह रहे हैं कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सवाल सिर्फ मार्च का नहीं है... सवाल यह है कि क्या सरकार छात्रों की आवाज सुनेगी, या फिर पटना की सड़कों पर आंदोलन और तेज होगा?

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