कोडिन कफ सिरप जब्ती पर NDPS एक्ट थमाना पुलिस की बड़ी भूल: पटना हाईकोर्ट का बिहार पुलिस को झटका
पटना: बिहार में कोडिन (Codeine) कफ सिरप जब्ती के मामलों में पुलिस द्वारा अंधाधुंध NDPS एक्ट लागू करने की प्रवृत्ति पर पटना हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कानूनी स्थिति को साफ करते हुए कहा कि यदि किसी दवा या सिरप में कोडिन का प्रतिशत सरकार द्वारा तय सीमा के भीतर है, तो पुलिस उस पर कड़ा नशीला पदार्थ विरोधी कानून (NDPS Act) नहीं थोप सकती। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' का उल्लंघन बनता है, लेकिन पुलिस कानून की स्थापित सीमाओं का उल्लंघन कर अभियुक्तों पर गलत धाराएं लगा रही है।
जानिए क्या है कोडिन कफ सिरप का कानूनी गणित और 2.5% का नियम
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अशोक कुमार पांडे की पीठ ने केंद्र सरकार की 14 नवंबर 1985 की ऐतिहासिक अधिसूचना का हवाला दिया। अदालत ने समझाया कि जिस कफ सिरप में प्रति खुराक इकाई (Dosage Unit) 100 मिलीग्राम से अधिक कोडिन न हो और जिसकी सांद्रता (Concentration) 2.5 प्रतिशत से अधिक न हो, उसे NDPS कानून के तहत 'निर्मित नशीले पदार्थ' (Manufactured Drugs) की प्रतिबंधित श्रेणी से बाहर रखा गया है। कोर्ट ने कहा कि कोडिन कफ सिरप अनिवार्य रूप से 'शेड्यूल H' की दवा है, जिसे बेचने के लिए दुकानदारों को लाइसेंस और बिक्री का रिकॉर्ड रखना होता है। यदि इसमें कोई अनियमितता पाई जाती है, तो वह केवल 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' के तहत ही दंडनीय है।
खगड़िया से जुड़ा मामला: वैन से बरामद हुई थी 484 लीटर सिरप
यह कानूनी फैसला खगड़िया जिले से सामने आए एक मामले की सुनवाई के दौरान आया, जहां पुलिस ने एक पिक-अप गाड़ी से 484 लीटर कोडिन युक्त कफ सिरप बरामद कर भरत कुमार नामक व्यक्ति को NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। आरोपी के वकील विजय किशोर भारती ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि जब्त सिरप में कोडिन की मात्रा 2.5% से काफी कम थी। इसके अलावा, आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं था और वह केवल वाहन के समीप मौजूद था। बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने पाया कि जब बरामद दवा खुद 'कॉन्ट्रैबेंड' (प्रतिबंधित नशीला पदार्थ) की श्रेणी में नहीं आती, तो फिर NDPS की कठोर धाराएं लगाना पूरी तरह से असंवैधानिक और प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 'व्यावसायिक मात्रा' के तर्क पर हाईकोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने 'हीरा सिंह बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के नजीर का हवाला दिया और तर्क दिया कि सिरप के कुल वजन को 'व्यावसायिक मात्रा' (Commercial Quantity) मानते हुए जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, पटना हाईकोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि 'व्यावसायिक मात्रा' का सिद्धांत केवल उन पदार्थों पर लागू होता है जो मूल रूप से NDPS एक्ट के दायरे में प्रतिबंधित हों। जब कोडिन का सिरप निर्धारित नियमों के तहत छूट प्राप्त श्रेणी में है, तो उसकी कुल मात्रा या वजन का सवाल ही नहीं उठता।
हाईकोर्ट ने दी जमानत, पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल
मामले के तमाम कानूनी पहलुओं और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी भरत कुमार को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अपने फैसले में अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस हर कोडिन कफ सिरप बरामदगी के मामले में बिना सोचे-समझे NDPS एक्ट का केस दर्ज कर रही है, जो कानून की मंशा के विपरीत है। अदालत के इस फैसले से बिहार में दवा विक्रेताओं और कोडिन कफ सिरप जब्ती से जुड़े दर्जनों मामलों में मुकदमे का सामना कर रहे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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