भक्ति मय वातावरण में कायस्थ समाज ने किया भगवान चित्रगुप्त महाराज का पूजन
पन्ना - जगत जननी मातेश्वरी मां कलेही की पावन एवं धार्मिक नगरी पवई में कायस्थ समाज द्वारा अपने आराध्य देव देवाधिदेव भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की पूजा-अर्चना अत्यंत श्रद्धा,आस्था और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई गांधी चौक पवई स्थित विष्णु प्रसाद खरे एडवोकेट एवं श्रीमती मीना खरे के निज निवास पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में समाज के अनेक परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान चित्रगुप्त महाराज के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच परंपरानुसार कलम,दवात, कागज,पेन और पुस्तकों का पूजन किया गया उपस्थित कायस्थ समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से अपने आराध्य देव का वंदन करते हुए सुख-समृद्धि,ज्ञान,प्रगति और परिवार की खुशहाली की कामना की इस अवसर पर वक्ताओं ने भगवान चित्रगुप्त महाराज के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे सृष्टि के समस्त प्राणियों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखने वाले देवता माने जाते हैं पुराणों के अनुसार उनका प्राकट्य ब्रह्मा जी की काया से हुआ,इसी कारण उनके वंशजों को कायस्थ कहा जाता है कथा-वाचन के दौरान बताया गया कि भगवान चित्रगुप्त महाराज जीवों के शुभ और अशुभ कर्मों का गुप्त रूप से निरीक्षण कर उनका लेखा-जोखा रखते हैं और उसी के आधार पर न्याय होता है उन्हें कलम के अधिष्ठाता देव भी माना जाता है,इसलिए पठन-पाठन,लेखन और ज्ञान से जुड़े सभी लोग उनकी विशेष श्रद्धा से पूजा करते हैं पद्म पुराण के सृष्टि खंड में भी उनकी उत्पत्ति का विस्तार से उल्लेख मिलता है कार्यक्रम में उपस्थित समाजजनों ने कहा कि कायस्थ केवल एक जाति नहीं बल्कि एक समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा है, जिसने शिक्षा,लेखन और प्रशासनिक परंपरा के माध्यम से सभ्य समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है पूजन के अंत में भगवान चित्रगुप्त महाराज की आरती एवं वंदन सामूहिक रूप से किया गया इस अवसर पर बड़ी संख्या में कायस्थ परिवारों की गरिमामयी उपस्थिति रही और पूरा वातावरण भक्ति श्रद्धा और सांस्कृतिक गौरव से ओतप्रोत नजर आया
संवाददाता - सुरेश कुमार द्विवेदी

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