43 साल तक ज्ञान की लौ जलाकर संवारती रहीं छात्राओं का भविष्य,नम आंखों से विदा हुईं रजनी श्रीवास्तव
पवई : एक शिक्षक की विदाई सिर्फ सेवा समाप्त होने का क्षण नहीं होती, बल्कि उन अनगिनत जीवनों की स्मृतियों का पड़ाव होती है,जिन्हें उसने ज्ञान और संस्कारों से संवारा हो शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पवई में ऐसा ही भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला,जब करीब 43 वर्षों तक छात्राओं को शिक्षा, संस्कार और जीवन मूल्यों की सीख देने वाली वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती रजनी श्रीवास्तव को सेवानिवृत्ति पर भावभीनी विदाई दी गई सम्मान और आत्मीयता से भरे समारोह में विद्यालय परिवार की आंखें नम रहीं और हर ओर उनके लंबे सेवाकाल की स्मृतियां ताजा होती रहीं श्रीमती श्रीवास्तव ने अपने चार दशक से अधिक लंबे सेवाकाल में हजारों छात्राओं को शिक्षित किया उन्होंने कक्षा में केवल पाठ्यक्रम पूरा करने को अपना दायित्व नहीं माना,बल्कि छात्राओं के व्यक्तित्व निर्माण को भी अपनी जिम्मेदारी समझा ज्ञान के साथ अनुशासन,संस्कार, नैतिक मूल्य,आत्मविश्वास और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उनकी शिक्षण शैली की पहचान रहे उनके मार्गदर्शन में पढ़ी अनेक छात्राएं आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता की पहचान बना रही हैं शॉल-श्रीफल एवं स्मृति चिह्न से किया सम्मान विदाई समारोह में विद्यालय परिवार परिजनों एवं शुभचिंतकों ने श्रीमती रजनी श्रीवास्तव को शॉल,श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया वक्ताओं ने उनकी कर्मनिष्ठा,सरलता,सहज व्यवहार और छात्राओं के प्रति मातृवत स्नेह को याद करते हुए कहा कि उनका सेवाकाल संस्था के लिए प्रेरणादायी रहा है वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक की नौकरी की अवधि समाप्त हो सकती है,लेकिन उसके द्वारा दिए गए संस्कार और ज्ञान की यात्रा कभी समाप्त नहीं होती रजनी श्रीवास्तव ने अपनी सेवा से विद्यालय की अनेक पीढ़ियों को प्रभावित किया है विदाई के मंच पर छलके भाव,बोलीं विद्यालय रहा मेरा दूसरा परिवार अपने उद्बोधन में श्रीमती रजनी श्रीवास्तव भावुक हो उठीं उन्होंने विद्यालय परिवार,सहकर्मियों एवं छात्राओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय उनके लिए कभी केवल कार्यस्थल नहीं रहा, बल्कि उनका दूसरा परिवार रहा है यहां बिताए वर्षों की यादें,सहकर्मियों का सहयोग और छात्राओं से मिला स्नेह उनके जीवन की अमूल्य धरोहर हैं उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि पूरी निष्ठा,ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने उद्देश्य की ओर बढ़े तो सफलता अवश्य मिलती है प्रत्येक व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत मौजूद है, जरूरत उसे पहचानकर सही दिशा में आगे बढ़ने की है छात्राओं की प्रस्तुतियों ने बांधा समां समारोह में छात्राओं ने आकर्षक सांस्कृतिक एवं संस्कृत प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में रंग भर दिया प्रस्तुतियों ने उपस्थितजनों की खूब तालियां बटोरीं संस्था प्राचार्य आर.सी. गुप्ता सहित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने श्रीमती श्रीवास्तव के दीर्घ एवं उत्कृष्ट सेवाकाल को संस्था के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय एवं यशस्वी जीवन की कामना की
ढोल-नगाड़ों के साथ निकली विदाई,गृह निवास पर हुआ भव्य स्वागत समारोह के अंत में विदाई का क्षण आया तो वातावरण पूरी तरह भावुक हो गया तालियों और शुभकामनाओं के बीच विद्यालय परिवार एवं परिजनों ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदा किया इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए विदाई यात्रा उनके सात बंगले स्थित गृह निवास तक पहुंची यहां परिवारजनों ने उनका आत्मीय एवं भव्य स्वागत किया कार्यक्रम का सफल मंच संचालन हरिशंकर प्रजापति ने किया इस अवसर पर संस्था प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यालय स्टाफ,छात्राएं, परिजन एवं पत्रकारगण मौजूद रहे सेवा से विदाई,यादों से नहीं 43 वर्षों तक शिक्षा की ज्योति जलाने वाली रजनी श्रीवास्तव की विदाई के साथ एक सेवाकाल भले समाप्त हुआ,लेकिन उनके द्वारा छात्राओं को दिए गए ज्ञान,संस्कार और प्रेरणा की रोशनी आगे भी पीढ़ियों तक अपना प्रभाव छोड़ती रहेगी यही एक शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि और उसकी शिक्षण साधना का वास्तविक सम्मान है।
संवाददाता : सुरेश संगम द्विवेदी

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