योगी, केशव और ब्रजेश एक साथ! BJP में खत्म हुई गुटबाजी?
अब बात करते हैं उत्तर प्रदेश की सियासत की...जहां नवाबों के शहर लखनऊ में दो दिनों तक ऐसा सियासी तूफान आया, जिसने यूपी से लेकर दिल्ली तक की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। जी हां, मिशन 2027 को फतह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लखनऊ की धरती पर पैर रखते ही ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि विरोधी चारों खाने चित हो गए हैं। यूपी में बीजेपी नेताओं के बीच मचे घमासान, मनभेद और मतभेद की खबरों पर नितिन नवीन ने ऐसा बुलडोजर चलाया है कि अब सब ठीक मोड में आ गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम के बीच की दूरियों को मिटाने के लिए चारपाई पर बैठकर आम खाने से लेकर, सहयोगी दलों को दिल्ली दरबार का न्योता देने तक...लखनऊ में जो कुछ भी हुआ, उसकी एक-एक जानकारी आज हम आपके सामने लेकर आए हैं।
दरअसल, कहानी शुरू होती है शनिवार को, जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिनों के महा-प्रवास पर नवाबों के शहर लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट से लेकर बीजेपी दफ्तर तक ऐसा रोड शो हुआ कि पूरा लखनऊ भगवा रंग में रंग गया। लेकिन असली खेल तो रविवार को शुरू हुआ, जिसकी चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। पिछले पांच साल में जो नजारा किसी ने नहीं देखा था, वो इस बार देखने को मिला। नितिन नवीन ने एक ऐसा ताना-बाना बुना कि यूपी के बड़े-बड़े धुरंधर एक मेज पर आ गए। रविवार को दोपहर में बीजेपी अध्यक्ष डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर पहुंचे, जहां एक शानदार मैंगो पार्टी रखी गई थी। वहां का नजारा देखने लायक था। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दूसरी तरफ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, साथ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी! सब के सब एक साथ चारपाई पर बैठे और बड़े ही अनौपचारिक माहौल में आम का स्वाद लेते दिखे। बात सिर्फ आम खाने तक नहीं रुकी! शाम के नाश्ते पर पूरा काफिला सीधे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के घर पहुंच गया। वहां शाम की चाय और नाश्ते की टेबल पर सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। साथ ही प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी वहां डटे हुए थे। इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के बीच की तथाकथित दूरियों को पूरी तरह से मिटा दिया और विरोधियों के मुंह पर ताला लगा दिया!
बीजेपी की इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का अंदाज बिल्कुल कड़क और दो टूक था। उन्होंने बिना लाग-लपेट के पार्टी के सभी दिग्गजों को एक लाइन में खड़ा कर दिया। नितिन नवीन ने साफ-साफ कह दिया कि संगठन और सरकार में मतभेद या मनभेद के लिए अब रत्ती भर भी जगह नहीं है। दोनों को एक ही पेज पर आना होगा। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "कोई भी नेता खुद को पार्टी से बड़ा समझने की भूल न करे! साल 2027 के चुनाव के लिए सबको पार्टी की तय की गई गाइडलाइन पर ही चलना होगा। सिर्फ यही नहीं, उन्होंने पूर्व अध्यक्षों...भूपेंद्र चौधरी, केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्रदेव सिंह, लक्ष्मीकांत वाजपेयी और सूर्य प्रताप शाही को एक साथ बिठाकर क्लास ली। उन्होंने कहा कि आप सबके अनुभव की 2027 में जरूरत है, लेकिन जमीन पर माहौल खराब न हो, इसकी जिम्मेदारी भी आप पुराने कप्तानों की ही है। उन्होंने साफ हिदायत दी कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने की जिम्मेदारी सरकार और पार्टी दोनों की है, इसलिए जमीन पर उतरकर काम में जुट जाइए।
वहीं सरकार को एक लाइन पर लाने के बाद नितिन नवीन रविवार को ही होटल ताज पहुंचे, जहां NDA के सहयोगी दलों के साथ मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा था...2027 में प्रचंड बहुमत के साथ तीसरी बार सरकार बनाना। हालांकि, इस बैठक में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई बात नहीं हुई, लेकिन सहयोगियों ने अपनी-अपनी मांगें और सुझाव खुलकर सामने रखे। जहां नितिन नवीन ने सभी सहयोगियों की बातें सुनीं और सबको संदेश दिया कि आपसी समन्वय को इस स्तर पर ले जाओ कि जीत का नया रिकॉर्ड बन जाए। साथ ही उन्होंने सबको बड़ा सरप्राइज देते हुए कहा कि सहयोगियों के साथ अब अगली बड़ी बैठक देश की राजधानी दिल्ली में होगी! वहीं इस दौरे के दौरान नितिन नवीन ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके 'PDA' फॉर्मूले पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल चुनाव के समय जागता है और जातीय राजनीति तथा झूठे वादों के सहारे जनता को गुमराह करना चाहता है, लेकिन यूपी की जनता अब चालाक हो चुकी है।
देखा जाए तो उत्तर प्रदेश की सियासत का सस्पेंस अब पूरी तरह खत्म हो चुका है! नितिन नवीन ने अपने दो दिनों के इस कड़क दौरे से यह साफ कर दिया है कि यूपी बीजेपी में न तो कोई गुटबाजी चलेगी और न ही कोई भीतरघात स्वीकार होगा। सबको एक ही पटरी पर, एक ही दिशा में दौड़ना होगा। चारपाई पर खाए गए आम और केशव मौर्य के घर हुए नाश्ते ने यह साबित कर दिया है कि 2027 की लड़ाई के लिए बीजेपी के सारे सिपहसालार अब एक साथ, एक मंच पर आ चुके हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि लखनऊ में बनी इस रणनीति का अगला धमाका दिल्ली की बैठक में किस तरह होता है और विपक्ष इसका क्या तोड़ निकालता है।
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