अरहर की अधिक पैदावार के लिए अपनाएं ये 10 जरूरी तरीके
अरहर (तुअर या pigeon pea) एक प्रमुख दलहनी फसल है, जो दालों में प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत मानी जाती है। भारत में अरहर की खेती मुख्यतः खरीफ मौसम में की जाती है और यह वर्षा पर आधारित फसल है। लेकिन उचित तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान इसकी उच्च गुणवत्ता वाली और अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।
जलवायु और भूमि का चयन
अरहर की खेती के लिए गरम और आर्द्र जलवायु उपयुक्त होती है।
अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम रहती है।
pH मान: 6.0 – 7.5 के बीच
बुवाई का समय और तरीका
समय: जून के मध्य से जुलाई के पहले सप्ताह तक
बीज दर: 12–15 किलो/हेक्टेयर
बुवाई विधि: कतारों में – कतार से कतार की दूरी 60–75 सेमी और पौधों की दूरी 20–25 सेमी
बीज उपचार: बीज को राइजोबियम कल्चर और फफूंदनाशक (थिरम या कार्बेन्डाजिम 2.5g/किग्रा बीज) से उपचारित करें।
सिंचाई प्रबंधन
अरहर वर्षा आधारित फसल है, परंतु सूखा पड़ने पर 1-2 हल्की सिंचाई देना आवश्यक है।
फूल आते समय और दाना बनने की अवस्था पर सिंचाई लाभकारी होती है।
खरपतवार नियंत्रण
बुवाई के 20–25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करें।
आवश्यकता अनुसार दूसरी निराई 45–50 दिन पर करें।
Pendimethalin 1 लीटर/हेक्टेयर का छिड़काव बुवाई के तुरंत बाद करने से प्रारंभिक खरपतवार नियंत्रित होते हैं।
रोग व कीट नियंत्रण
आम कीट:
पॉड बोरर (फल छेदक): Helicoverpa armigera
नियंत्रण: नीम आधारित कीटनाशक (NSKE 5%) या Spinosad 2.5 ml/L पानी में छिड़काव।
रोग:
रूट रॉट (जड़ सड़न):
नियंत्रण: थिरम + कार्बेन्डाजिम से बीज उपचार
विल्ट रोग (मुरझाना):
नियंत्रण: रोग सहनशील किस्मों का चयन करें और फसल चक्र अपनाएं।
कटाई और भंडारण
जब 80% फलियाँ सूख जाएं, तो फसल की कटाई कर लें।
कटाई के बाद अच्छी तरह सूखाकर दानों को निकालें।
बीजों को सूखे और हवादार स्थान पर नीम की पत्तियों या भंडारण कीटनाशक के साथ रखें।
औसत उपज
सामान्य किस्मों से: 18–25 क्विंटल/हेक्टेयर
उन्नत तकनीक से: 30+ क्विंटल/हेक्टेयर तक
विशेष सलाह:
हमेशा प्रमाणित बीजों का उपयोग करें।
फसल बीमा और मृदा परीक्षण अवश्य कराएं।
कीट और रोगों की समय-समय पर निगरानी करें।

No Previous Comments found.