पीयूष गोयल का कांग्रेस पर हमला, बोले- चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक रिवॉर्ड दिए
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस के व्यवहार को बचकाना बताते हुए राहुल गांधी के आरोपों को झूठा और बेबुनियाद करार दिया। गोयल ने कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों और बाद में उन्हें मिले सरकारी पदों का हवाला देते हुए पार्टी के पुराने रिकॉर्ड पर सवाल उठाए।
पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस आज चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है, लेकिन अपने शासनकाल में लिए गए फैसलों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक पद और सम्मान दिए गए। गोयल के मुताबिक, एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त को कांग्रेस के टिकट पर उम्मीदवार बनाया गया, जबकि एक अन्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली। उन्होंने दो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल बनाए जाने का भी जिक्र किया।
केंद्रीय मंत्री ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका राजनीतिक और सरकारी पदों पर आना-जाना सौदेबाजी का प्रतीक लगता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव आयुक्तों को उनकी सेवाओं के बदले राजनीतिक रिवॉर्ड दिए।
पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शेषन का मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यकाल 31 दिसंबर 1985 को समाप्त हुआ था और इसके दो महीने के भीतर कांग्रेस ने उन्हें राज्यपाल बना दिया। गोयल ने सवाल उठाया कि क्या इस तरह के फैसले रिश्वत देने जैसे नहीं हैं।
पीयूष गोयल ने 2005 का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी और नवीन चावला के मामले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उस समय यह आरोप लगाया गया था कि सोनिया गांधी ने नवीन चावला को चुनाव आयुक्त बनवाया। गोयल ने सवाल किया कि जब सोनिया गांधी सरकार में नहीं थीं, तो नियुक्ति का फैसला किसके प्रभाव में हुआ। उन्होंने कहा कि उस समय चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती थी और नियुक्ति प्रक्रिया में आज की तरह सलाह-मशविरा नहीं होता था। गोयल ने इसी व्यवस्था का हवाला देते हुए कांग्रेस के पुराने फैसलों पर सवाल उठाए।
केंद्रीय मंत्री ने टीकाराम मीणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वह केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी थे और बाद में उन्हें कांग्रेस की राजस्थान घोषणापत्र टीम में शामिल किया गया। गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग के पदों का राजनीतिक इस्तेमाल किया और चुनाव आयुक्तों को उनके काम के बदले राजनीतिक लाभ पहुंचाया।
पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस का चुनाव आयोग पर सवाल उठाना उसके पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों और उन्हें बाद में दिए गए पदों को लेकर पक्षपात हुआ। उनके इन बयानों के जरिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

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