टेक्नोलॉजी को हथियार बनाया तो रुकेगी तरक्की, BRICS में PM मोदी का बड़ा बयान

BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर बड़ा संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों का हथियार की तरह इस्तेमाल BRICS देशों की साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी को अपनाने की प्रक्रिया समावेशी होनी चाहिए, ताकि इसका लाभ अधिक से अधिक देशों और लोगों तक पहुंच सके।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान रेजिलिएंस, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी पर विशेष जोर दिया गया। इसी सोच के तहत टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, सप्लाई चेन और डिजिटल खेती जैसे क्षेत्रों में कई पहल की गई हैं। प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के वेपनाइजेशन यानी हथियार की तरह इस्तेमाल को साझा प्रगति के लिए चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का लाभ कुछ देशों या चुनिंदा समूहों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्लोबल साउथ की भविष्य की तकनीकों के विकास और उनसे जुड़े नियम तय करने में भी बराबर भागीदारी होनी चाहिए।

पीएम मोदी ने डिजिटल खेती को लेकर BRICS नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से किसानों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इसके तहत AI, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि तकनीक का इस्तेमाल खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान में किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने BRICS इन्क्यूबेटर नेटवर्क और स्टार्टअप इनोवेशन फंड का भी जिक्र किया। इन्क्यूबेटर नेटवर्क के जरिए BRICS देशों के स्टार्टअप और इन्क्यूबेटर्स को जोड़ने की पहल की गई है। वहीं, स्टार्टअप इनोवेशन फंड के जरिए बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले नए समाधानों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया है। BRICS लॉजिस्टिक सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इससे सप्लाई चेन को अधिक भरोसेमंद और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में मजबूत और सुरक्षित सप्लाई चेन को साझा विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

BRICS देशों के बीच संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए इंटीग्रेटेड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम पर भी सहमति बनी है। पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी चुनौती की समय पर पहचान, उसके लिए तैयारी और तत्काल कार्रवाई बेहद जरूरी है।

इसके अलावा डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए अर्ली वॉर्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइंस तैयार की गई हैं। पीएम मोदी ने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने यह स्पष्ट किया है कि आपस में जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।

भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान इन पहलों के जरिए रेजिलिएंस, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश रहा कि तकनीकी प्रगति का लाभ व्यापक और समावेशी होना चाहिए, ताकि BRICS देशों के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की भी साझा प्रगति सुनिश्चित की जा सके।

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