क्यों पीएम चाहते हैं कि आप ज्वेलरी खरीदना टाल दें? रुपये को बचाने का 'मास्टरप्लान'!

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके हाथ की एक सोने की अंगूठी या गले का हार देश की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है? जी हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी अपील की है जिसने देश के सर्राफा बाजार से लेकर विदेशी गलियारों तक हलचल मचा दी है। हैदराबाद की रैली में पीएम ने साफ कहा कि देशभक्ति सिर्फ सीमा पर जान देना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में जिम्मेदारी से जीना भी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों पीएम मोदी चाहते हैं कि आप एक साल तक सोना न खरीदें? क्यों वो वर्क फ्रॉम होम और पेट्रोल बचाने पर जोर दे रहे हैं? क्या देश पर कोई आर्थिक संकट है या यह आने वाले किसी बड़े तूफान से पहले की तैयारी है? आइए जानते हैं। 

भारत एक ऐसा देश है जो अपनी जरूरतों के लिए दुनिया पर निर्भर है। हम अपनी तेल जरूरतों का 90 फीसदी और सोने की खपत का करीब 99 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करते हैं। दिक्कत यह है कि जब हम बाहर से सामान खरीदते हैं, तो हमें अपनी तिजोरी से डॉलर निकालने पड़ते हैं। इसे आसान भाषा में समझें तो भारत हर साल करीब 700 से 800 टन सोना विदेशों से मंगाता है। साल 2025-26 में भारत का गोल्ड इम्पोर्ट बिल 72 अरब डॉलर तक जा पहुंचा था। अगर हम एक साल के लिए अपनी सोने की भूख कम कर लें, तो हम सीधे तौर पर 30 से 35 अरब डॉलर बचा सकते हैं। यह रकम हमारे चालू खाता घाटे को आधा करने के लिए काफी है! आपको बता दें आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपया दबाव में है। आज मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अब ऐसे में आप गणित समझिए कि अगर रुपया कमजोर होता है और डॉलर महंगा, तो हमें वही तेल और वही सोना खरीदने के लिए पहले से कहीं ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं। 

एक तरफ मिडिल ईस्ट में जंग के बादल हैं जिससे कच्चा तेल 100 डॉलर के पार निकल गया है, और दूसरी तरफ डॉलर की बढ़ती मांग रुपये को और कमजोर कर रही है। ऐसे में पीएम की अपील का मकसद डॉलर की मांग घटाकर रुपये की कीमत को बढ़ाना है। दरअसल, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल करीब 690.69 अरब डॉलर के आसपास है। यह सुनने में बहुत बड़ा लगता है, लेकिन वैश्विक मंदी, महामारी या युद्ध जैसी स्थिति में यही भंडार हमारे लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। वहीं अप्रैल में यह भंडार 728 अरब डॉलर से गिरकर 691 अरब डॉलर पर आ गया है। ऐसे में अगर डॉलर की कमी हुई, तो देश में महंगाई आसमान छूने लगेगी और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबू हो जाएंगी। इसीलिए पीएम मोदी ने आर्थिक देशभक्ति का मंत्र दिया है।

आपको बता दें पीएम की अपील का असर सोमवार को बाजार खुलते ही दिखने लगा। मुंबई के मशहूर जवेरी बाजार समेत देशभर के शोरूम्स में ग्राहकों की चहल-पहल कम रही। लेकिन यहां एक दिलचस्प मोड़ आया है! लोग सोने से तो बच रहे हैं, लेकिन चांदी की तरफ भाग रहे हैं। जी हां सोमवार को चांदी की कीमतें 2,200 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गईं और भाव 2,64,922 रुपये प्रति किलो के स्तर को छू गया। निवेशक अब सोने के विकल्प के तौर पर चांदी और 'सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड' को देख रहे हैं। ज्वेलर्स का कहना है कि 10 ग्राम सोने का भाव डेढ़ लाख के पार होने की वजह से भी लोग अब निवेश के नए रास्ते तलाश रहे हैं। आपको बता दें सिर्फ सोना ही नहीं, पीएम मोदी ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की बात कही है। तेल का आयात कम होगा तो डॉलर देश के अंदर बचेगा। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे एक परिवार अपनी आमदनी कम होने पर फिजूलखर्ची रोक देता है ताकि भविष्य सुरक्षित रहे। भारत इस समय किसी तत्काल संकट में नहीं है, लेकिन सरकार चाहती है कि हम सुरक्षित बनें ताकि दुनिया के संकट का हम पर कोई असर न पड़े।

तो अब फैसला आपके हाथ में है! क्या आप अपनी अगली ज्वेलरी की खरीदारी को एक साल के लिए टालकर देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देंगे? पीएम मोदी की यह अपील सिर्फ एक आर्थिक सलाह नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक कॉल टू एक्शन है। अगर हम सोने के मोह को थोड़े समय के लिए छोड़ दें और ईंधन की बचत करें, तो भारतीय रुपया फिर से सीना तानकर डॉलर के सामने खड़ा हो सकता है। याद रखिए, आपकी छोटी सी बचत देश के लिए अरबों डॉलर का सुरक्षा चक्र बन सकती है।

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