PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, ओवैसी ने बाबर के नाम पर कसा तंज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य एशिया यात्रा इस समय कूटनीतिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है। एक तरफ जहां उज्बेकिस्तान में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया और भारतीयों को 30 दिनों की वीजा-फ्री एंट्री का बड़ा तोहफा मिला, वहीं दूसरी तरफ इस सम्मान पर भारत की घरेलू राजनीति में ज़बरदस्त बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा तंज कसा है। ओवैसी ने कहा जिस बाबर के नाम पर हमें गालियां देते थे, उसी बाबर के देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अवॉर्ड दे दिया। देखिए पूरी रिपोर्ट....

दरअसल, उज्बेकिस्तान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां के सर्वोच्च मित्रता सम्मान 'ओली दाराजाली दोस्तलिक' सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान किसी मित्र देश के नेता को दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने में योगदान के लिए दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को भारत और उज्बेकिस्तान की दोस्ती को समर्पित किया। लेकिन जैसे ही सम्मान की तस्वीरें और खबरें सामने आईं, विपक्ष की तरफ से प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गईं। पीएम मोदी को सम्मान दिए जाने पर असदुद्दीन ओवैसी ने कटाक्ष किया। हैदराबाद में अपनी बात रखते हुए ओवैसी ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस को इस बात पर सोचना चाहिए कि जिस बाबर के नाम पर वे भारत में लोगों को गालियां देते हैं, उसी बाबर की सरजमीं ने उनके प्रधानमंत्री को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया है। 

दरअसल, मध्य एशिया की ऐतिहासिक फरगना घाटी मुख्य रूप से उज्बेकिस्तान में ही स्थित है, जहां से भारत पर आक्रमण करने वाला पहला मुगल शासक बाबर ताल्लुक रखता था। ओवैसी ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए बीजेपी की विचारधारा और उसकी विदेश नीति के नतीजों पर राजनीतिक कटाक्ष किया। यानी एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों की नई तस्वीर दिखाई दे रही थी...तो दूसरी तरफ भारत में इस सम्मान को लेकर सियासी वार-पलटवार शुरू हो गया। लेकिन इस पूरी कहानी को सिर्फ ओवैसी के बयान तक सीमित करके देखना तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा होगा। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर बात हुई और सबसे बड़ी खबर ये रही कि उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिन की वीजा-फ्री यात्रा की घोषणा कर दी। यानी राजनीति में बयानबाजी अपनी जगह...लेकिन कूटनीति के मोर्चे पर भारत को कई अहम फायदे मिलते दिखाई दे रहे हैं। वहीं दोनों देशों के बीच हुए मुख्य समझौतों और ऐतिहासिक प्रगति की बात करें तो....

भारतीय अब पर्यटन और बिज़नेस के सिलसिले में बिना वीजा 30 दिनों तक उज्बेकिस्तान जा सकेंगे।

द्विपक्षीय व्यापार पहली बार 1 अरब डॉलर को पार कर गया है। 

अब इसे साल 2030 तक 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।

यूरेनियम की निर्बाध आपूर्ति के लिए लॉन्ग-टर्म समझौता करने पर सहमति बनी। 

साथ ही, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के स्तर पर एक 'समन्वय काउंसिल' गठित की जाएगी।

पर्यटन, शिक्षा, शोध, स्वास्थ्य और आयुर्वेद जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कुल 11 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

'न्यू ताशकंद' और गुजरात की 'गिफ्ट सिटी' के बीच तकनीकी तालमेल बढ़ाने के साथ-साथ तीन सिस्टर-सिटी/स्टेट समझौतों पर सहमति बनी। 

वर्तमान में दोनों देशों के बीच हर हफ्ते 14 सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं।

वहीं उज्बेकिस्तान का सफल दौरा खत्म करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी मध्य एशियाई यात्रा के दूसरे चरण में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे। जहां हवाई अड्डे पर किर्गिज मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष ने उनका भव्य पारंपरिक स्वागत किया। आपको बता दें पीएम मोदी की मध्य एशिया की चार दिवसीय यात्रा का दूसरा चरण है। बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दरअसल, बिश्केक में होने वाला SCO सम्मेलन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, उग्रवाद, संपर्क व्यवस्था, व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी और संयुक्त कार्रवाई की बात करता रहा है। 

ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी SCO के मंच से आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ भारत की नीति को मजबूती से रख सकते हैं। इसके साथ ही आर्थिक विकास, डिजिटल सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी भारत की प्राथमिकताओं में रहेंगे। वहीं बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी की कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें प्रस्तावित हैं। इनमें सबसे ज्यादा नजर रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ होने वाली मुलाकात पर है। आपको बता दें भारत और रूस के रिश्तों में ऊर्जा, व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे में SCO सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। इसके साथ ही SCO सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई बड़े नेता हिस्सा ले रहे हैं। यानी एक ही मंच पर भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान और मध्य एशिया के प्रमुख देश मौजूद होंगे। वहीं अब आप सोच रहे होंगे कि भारत के लिए ये SCO सम्मेलन इतना खास क्यों हैं, तो आपको बता दें....

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना।

आज यह संगठन भारत को रूस, चीन, ईरान और मध्य एशियाई देशों के साथ एक ही मंच पर संवाद का अवसर देता है।

भारत के लिए मध्य एशिया रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार मार्ग, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से मध्य एशिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

इसीलिए भारत अपनी 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत इस क्षेत्र के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च मित्रता सम्मान मिलना जहां भारत के लिए कूटनीतिक तौर पर बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, वहीं इस सम्मान ने भारत की राजनीति में एक नई बहस भी छेड़ दी है। असदुद्दीन ओवैसी ने बाबर और फरगना घाटी का हवाला देकर बीजेपी और RSS पर तंज कसा है... लेकिन दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को भारत और उज्बेकिस्तान की दोस्ती को समर्पित किया है। उज्बेकिस्तान ने भारतीयों के लिए 30 दिन की वीजा-फ्री यात्रा का ऐलान किया है, दोनों देशों ने व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य रखा है और कई क्षेत्रों में समझौते हुए हैं। अब नजर बिश्केक पर है...जहां SCO के मंच पर प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात रूस, चीन, ईरान और दूसरे देशों के नेताओं से होगी। यानी एक तरफ देश के अंदर बाबर पर सियासत गरम है... और दूसरी तरफ मध्य एशिया में भारत की कूटनीति नए समीकरण गढ़ रही है। अब देखना होगा कि बिश्केक में होने वाली बैठकों से भारत को क्या हासिल होता है और SCO के मंच से प्रधानमंत्री मोदी क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग को लेकर दुनिया के सामने क्या बड़ा संदेश देते हैं। 

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