1000 साल पुराने हिंदू मंदिर में गूंजा 'ॐ नमः शिवाय', प्रम्बानन पहुंचे PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान एक ऐसा पल सामने आया, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर प्रम्बानन मंदिर का एक वीडियो साझा किया, जिसमें पूरे मंदिर परिसर में 'ॐ नमः शिवाय' का सामूहिक मंत्रोच्चार सुनाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद इसे लाखों लोग देख चुके हैं और यह तेजी से सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।

वीडियो के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने संक्षिप्त संदेश लिखते हुए कहा, "इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर में ॐ नमः शिवाय!"। वीडियो में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शांत भाव से मंदिर परिसर में बैठे दिखाई देते हैं। सभी एक स्वर में भगवान शिव के मंत्र का जाप कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी भी हाथ जोड़कर इस आध्यात्मिक वातावरण का हिस्सा बनते नजर आते हैं। पूरे परिसर का माहौल श्रद्धा और भक्ति से सराबोर दिखाई देता है।
बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और परिसर का अवलोकन किया। यह मंदिर हिंदू धर्म की त्रिमूर्ति भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित माना जाता है। दोनों नेता हेलीकॉप्टर के जरिए योग्याकार्ता से इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पहुंचे। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर का हवाई दृश्य भी साझा किया और उसकी भव्यता की सराहना की।

इस यात्रा का महत्व केवल धार्मिक या सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। दोनों देशों ने प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए संयुक्त रूप से काम करने पर सहमति जताई है। हाल ही में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान इस संबंध में एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' का आदान-प्रदान भी किया गया, जिससे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में दोनों देशों का सहयोग और मजबूत होगा।

प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है। दक्षिण-पूर्व एशिया में कंबोडिया के अंकोरवाट के बाद इसे दूसरा सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है। करीब 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस ऐतिहासिक परिसर में कभी लगभग 240 मंदिर मौजूद थे। यह स्थल भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
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