15 साल से जमीन के लिए लड़ रहे थे असगर अली वोरा! PM मोदी से मिले तो बदला मामला

कहते हैं ना कि यारियां अगर पक्की हों, तो अच्छे-अच्छों के सिंहासन हिल जाते हैं और यहाँ तो मामला देश के मुखिया यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूल के पुराने यार का है! जरा सोचिए, एक 81 साल का बुज़र्ग जो पिछले 15 सालों से दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर अपनी ही ज़मीन वापस पाने के लिए धक्के खा रहा हो, उसकी एक मुलाकात ने पूरे सिस्टम में ऐसा भूचाल लाया कि बड़े-बड़े रसूखदारों के पसीने छूट गए। जी हाँ, पीएम मोदी के साथ बचपन में बेंच शेयर करने वाले असगर अली वोरा को उनका हक मिल गया है! बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता को आखिरकार झुकना पड़ा और उन्होंने विवादित ज़मीन से अपना कब्जा छोड़ दिया है। आइए आपको बताते हैं इस कहानी की पूरी इनसाइड स्टोरी, कैसे एक झटके में बदल गया 15 साल पुराना खेल!

कहानी है असगर अली वोरा की...दावा है कि वो गुजरात के वडनगर स्थित बी.एन. स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पढ़ चुके हैं। असगर अली वोरा का कहना है कि भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में उनकी करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन को लेकर करीब डेढ़ दशक से विवाद चल रहा था। वोरा का आरोप था कि उनकी जमीन पर स्वयम् बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस से जुड़े लोगों ने कब्जा कर लिया। वोरा का कहना था कि उन्होंने इस मामले को लेकर अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर लगाए, शिकायतें कीं और सालों तक अपनी जमीन के लिए लड़ाई लड़ी...लेकिन समाधान नहीं निकला। फिर आया 8 सितंबर का दिन...जब असगर अली वोरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले और अपनी जमीन का पूरा मामला उनके सामने रखा। उन्होंने इस विवाद में दखल देने की मांग की और कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच के लिए CBI जांच की मांग भी रखी। और अब... इस मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद महाराष्ट्र के मंत्रालय में बैठक होती है...बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी ने की। जहां बैठक में खुद असगर अली वोरा, बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम की कमिश्नर राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद रहे। यानी जिस मामले को लेकर एक बुजुर्ग करीब डेढ़ दशक से शिकायतें कर रहे थे...अब उसी मामले में शिकायतकर्ता, विधायक और नगर निगम के बड़े अधिकारी एक ही टेबल पर थे। बैठक के दौरान नरेंद्र मेहता की तरफ से टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र दिया गया। बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की तरफ से विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और निर्माण की अनुमति वापस करने की बात कही जाती है...इतना ही नहीं, वोरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात भी सामने आती है। इसके पीछे उन्होंने दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की बात कही।

वहीं अब इस पूरी कहानी का एक और अहम हिस्सा समझिए। दरअसल, बात साल 1989 की है, जब मीरा रोड के रहने वाले असगर अली वोरा ने भायंदर के नवघर इलाके में करीब 2,810 स्क्वायर मीटर जमीन बहुत उम्मीदों के साथ खरीदी थी। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन साल 2011 में उनकी जिंदगी में जैसे भूचाल आ गया। आरोप लगा कि 'स्वयं बिल्डर्स' और बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की कंपनी 'सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स' ने उनकी इस कीमती ज़मीन पर अवैध कब्जा जमा लिया। इसके बाद शुरू हुआ सरकारी दफ्तरों, फाइलों और अदालतों का अंतहीन चक्कर। 81 साल की उम्र में असगर अली वोरा न्याय की आस में अधिकारियों के दरवाजे खटखटाते-खटखटाते थक चुके थे। यहाँ तक कि साल 2015 में मामला पुलिस तक भी पहुँचा और क्रॉस शिकायतें भी दर्ज हुईं। वोरा का आरोप था कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी कागजात तैयार कर ज़मीन पर कब्जा किया गया। वहीं जब चारों तरफ से दरवाजे बंद होते दिखे, तो वोरा साहब ने अपने पुराने स्कूल के दोस्त का दरवाजा खटखटाने की ठानी। वो 8 सितंबर को सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने जा पहुँचे। पीएम मोदी के सामने उन्होंने अपनी ज़मीन हड़पे जाने की पूरी दास्तान रख दी। प्रधानमंत्री ने उनकी बात को गंभीरता से सुना और उन्हें न्याय का पूरा भरोसा दिलाया। बस फिर क्या था, जैसे ही पीएम ऑफिस से सुगबुगाहट हुई, महाराष्ट्र की सियासत और प्रशासन में हड़कंप मच गया!

तो देखा आपने ताकत, एक पुरानी दोस्ती और मजबूत जिद की! जहाँ आम इंसान 15 साल तक धक्के खाता रह जाता है, वहीं सही जगह पर बात पहुँचे तो सिस्टम कैसे चंद दिनों में हरकत में आ जाता है। 81 साल के असगर अली वोरा की इस जंग ने साबित कर दिया कि हौसला बुलंद हो और ऊपर वाले का साथ मिल जाए, तो बड़े से बड़ा ताकतवर भी झुकने पर मजबूर हो जाता है। फिलहाल, बुज़र्ग वोरा को उनका हक मिल चुका है और मीरा रोड से लेकर मंत्रालय तक इसी एक बात की चर्चा है। 

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