PMO का फर्जी अफसर और लोडेड गन! मुंबई में PM मोदी के कार्यक्रम से पहले हड़कंप

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का सबसे सुरक्षित इलाका BKC... सामने विशालकाय जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 का उद्घाटन करने पहुंचने वाले थे! चारों तरफ एसपीजी का कड़ा पहरा, चप्पे-चप्पे पर स्नाइपर्स और अलर्ट पुलिस बल। लेकिन तभी सुरक्षा घेरे के ठीक बाहर दो ऐसे संदिग्ध टकराते हैं, जो पहली नज़र में सीधे प्रधानमंत्री की सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक की तरफ इशारा करते हैं। 24 साल का एक रईस बिजनेसमैन का बेटा खुद को PMO यानी प्रधानमंत्री कार्यालय का बड़ा अफसर बता रहा था और उसके साथ खड़ा था उसका एक प्राइवेट बॉडीगार्ड, जिसके पास थी लोडेड गन! लेकिन जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो यह केस सिर्फ सुरक्षा में चूक का नहीं, बल्कि फर्जी सरकारी अफसरों की ऐसी खौफनाक और पेचीदा जालसाजी में बदल गया, जिसने खुफिया एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। आइए जानते हैं क्या है मुंबई में घटे इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे का पूरा सच!

दरअसल, 7 सितंबर की शाम करीब 5:30 बजे, बांद्रा के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर के एंट्री गेट पर सुरक्षा जांच चल रही थी। तभी 24 साल का रोहन पारेख अपने बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे के साथ अंदर घुसने की कोशिश करने लगा। बॉडीगार्ड जैसे ही मेटल डिटेक्टर से गुजरा, तेज बीप की आवाज आई। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत रोका और तलाशी ली, तो उसके पास से एक रिवॉल्वर बरामद हुई। बॉडीगार्ड ने तुरंत रोहन पारेख को बुलाया। रोहन पारेख ने रौब जमाते हुए जेब से एक पहचान पत्र निकाला और कहा कि "मैं पीएमओ में ग्रेड-सी का अफसर हूं, मुझे रोकने की हिम्मत मत करो!" लेकिन रोहन की यही होशियारी उसके लिए गले की फांस बन गई। सुरक्षाकर्मियों ने जब आईडी कार्ड को गौर से देखा तो उसमें भारी झोल नजर आया। कार्ड पर जारी होने की तारीख तो थी, लेकिन उसकी वैलिडिटी कब खत्म होगी, इसका जिक्र ही नहीं था। सबसे बड़ा सुराग यह था कि कार्ड पर जारी करने वाले अधिकारी के साइन तो थे, लेकिन उसका नाम नदारद था, जबकि असली PMO कार्ड पर अफसर का नाम होना अनिवार्य है। 

पुलिस ने तुरंत दोनों को धर दबोचा और फर्जी आईडी व आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार कर 11 सितंबर तक रिमांड पर ले लिया। वहीं कोर्ट पहुंचते ही इस कहानी ने एक ऐसा हैरान कर देने वाला मोड़ लिया कि हर कोई सन्न रह गया। जी हां रोहन के वकील ने दावा किया कि रोहन कोई अपराधी नहीं, बल्कि खुद एक बहुत बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हुआ है! वकील के मुताबिक रोहन को पीएमओ में नौकरी का एक फर्जी ऑफर लेटर ई-मेल पर मिला था। ई-मेल के जरिए ही उसे पीएमओ का यह आईडी कार्ड भेजा गया था। यहां तक कि उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फर्जी साइन वाला एक आधिकारिक पत्र भी ई-मेल पर मिला, जिसमें उसे सलाह दी गई थी कि उसका पद संवेदनशील है, इसलिए वह अपनी सुरक्षा के लिए पर्सनल बॉडीगार्ड रख ले।

ई-मेल भेजने वाले खुद को तरुण कपूर, तरुण गुप्ता और महक गुप्ता बताकर डिफेंस पॉलिसी से जुड़े सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स रोहन को भेज रहे थे। वहीं रोहन पारेख, जिसने गणित और विज्ञान में BSc कर रखी है, उसने दावा किया कि वह पीएम के कार्यक्रम में घुसने नहीं आया था, बल्कि अपनी मंगेतर के लिए मॉल में परफ्यूम खरीदने आया था! लेकिन पुलिस के मन में अब भी तीखे सवाल तैर रहे हैं कि बिना सैलरी मिले कोई खुद को असली PMO अफसर कैसे मान सकता है? कोई पढ़ा-लिखा व्यक्ति ई-मेल पर आए सरकारी लेटर पर आंख मूंदकर यकीन कैसे कर सकता है? और कोई प्राइवेट अफसर खुद का बॉडीगार्ड क्यों रखेगा, जबकि सरकारी अफसरों को सुरक्षा सरकार देती है? हालांकि आपको बता दें 
यह पहली बार नहीं है जब देश में नकली VIP या फर्जी IAS-IPS बनकर सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाया गया हो। पिछले कुछ सालों में ऐसे कई बहरूपिये पकड़े जा चुके हैं। जिसमें पहला नाम है बिहार के मनीष कुमार गुप्ता का। खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट और IAS बताने वाला यह शख्स हाल ही में पकड़ा गया। इसने बाढ़ प्रभावित खगड़िया में 100 सीसीटीवी कैमरों वाला 5 मंजिला आलिशान महल बना रखा था और 10 साल में फर्जी अफसर बनकर करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति खड़ी कर ली थी। दूसरा नाम है गुजरात के किरण पटेल का। साल 2023 में इस ठग ने खुद को PMO का एडिशनल डायरेक्टर बताया और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से जेड-प्लस सुरक्षा, बुलेटप्रूफ गाड़ियां और फाइव स्टार सुविधाएं लेकर महीनों तक पूरे सरकारी अमले को चूना लगाया।

आपको बता दें प्रधानमंत्री की सुरक्षा गृह मंत्रालय की 'ब्लू बुक' और SPG के कड़े प्रोटोकॉल के तहत होती है, जिसमें किसी परिंदे को भी पर मारने की इजाजत नहीं होती। किसी बड़े कार्यक्रम से पहले सुरक्षा एजेंसियां कार्यक्रम स्थल की जांच करती हैं और प्रवेश को लेकर बेहद कड़े प्रोटोकॉल लागू किए जाते हैं। ऐसे में PMO का फर्जी पहचान पत्र लेकर कोई व्यक्ति सुरक्षा घेरे के आसपास तक पहुंच जाए और उसके साथ हथियारबंद व्यक्ति भी मौजूद हो...तो मामला स्वाभाविक तौर पर गंभीर हो जाता है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सुरक्षा में वास्तविक चूक हुई या नहीं, इसकी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

देखा जाए तो मुंबई की ये कहानी फिलहाल कई सवालों के बीच खड़ी है। एक तरफ पुलिस के मुताबिक, रोहन पारेख ने PMO अधिकारी होने का दावा किया और उसके पास से कथित फर्जी आईडी बरामद हुई। उसके साथ मौजूद दिलीप कुंडे के पास से हथियार मिलने की बात भी सामने आई है। लेकिन दूसरी तरफ अदालत में रोहन के वकील ने दावा किया है कि रोहन खुद एक ऐसे फर्जीवाड़े का शिकार है, जिसमें उसे ई-मेल, नौकरी के ऑफर और कथित सरकारी दस्तावेजों के जरिए यह विश्वास दिलाया गया कि वह PMO से जुड़ा अधिकारी है। अब असली सच जांच से सामने आएगा। फिलहाल इतना तय है कि इस मामले ने एक बार फिर देश के सामने फर्जी सरकारी अफसरों और फर्जी पहचान के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है। 

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