मोदी की एक अपील और बदल गया भारत: काफिले हुए छोटे, मंत्रियों ने पकड़ी मेट्रो
दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है. वेस्ट एशिया में तनाव है, वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव है. ऐसे में देश के प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी ने 11 मई 2026 को हैदराबाद की धरती से एक ऐसी अपील की, जिसने पूरे देश की कार्यशैली को बदल कर रख दिया है. जी हां पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि "बचत के लिए पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करें, एक साल तक सोना न खरीदें और विदेश यात्राएं टाल दें." लेकिन यह सिर्फ एक उपदेश नहीं था. प्रधानमंत्री ने इसकी शुरुआत खुद से की है. जी हां आज पीएम मोदी का अपना काफिला 50 फीसदी छोटा हो गया है, और उनके इस त्याग ने पूरे देश के सियासी गलियारों में सादगी की एक नई सुनामी ला दी है!
प्रधानमंत्री के आदेश के बाद SPG ने उनके काफिले में गाड़ियों की संख्या आधी कर दी है. चौंकाने वाली बात यह है कि पीएम ने नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने के बजाय मौजूदा संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया है. पीएम की इस नसीहत का असर वडोदरा और गुवाहाटी के दौरों में साफ दिखा, जहां उनका कारकेड पहले के मुकाबले बेहद छोटा नजर आया. प्रधानमंत्री की इस राह पर गृह मंत्री अमित शाह भी चल पड़े हैं. शाह के काफिले में अब पहले के मुकाबले आधे से भी कम वाहन दिख रहे हैं. दिल्ली की सड़कों पर जब शाह का छोटा काफिला निकला, तो लोग दंग रह गए. वहीं उत्तर प्रदेश की बात करें तो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ अपना काफिला छोटा किया, बल्कि मंत्रियों और अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दे दिए हैं. योगी ने कहा है कि सप्ताह में एक दिन 'नो व्हीकल डे' मनाया जाए और जनप्रतिनिधि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें. सरकारी बैठकें अब वर्चुअल होंगी और स्टार्ट-अप्स के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' की एडवाइजरी जारी कर दी गई है.
वहीं बिहार में तो अद्भुत नजारा दिखा! महुआ में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तीन-तीन कद्दावर मंत्री संजय सिंह, संजय पासवान और लखेंद्र पासवान अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही सरकारी गाड़ी में सवार होकर पहुंचे. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी अपने काफिले को न्यूनतम करने का ऐलान कर दिया है और सरकारी कैंटीन में पाम ऑयल तक के कम इस्तेमाल का आदेश दे दिया है. तो दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली में भी मोदी मैजिक का असर दिख रहा है. दिल्ली के मंत्री आशीष सूद ई-रिक्शा और मेट्रो से सफर कर कड़कड़डूमा कोर्ट पहुंचे, तो वहीं कानून मंत्री कपिल मिश्रा भी मेट्रो में आम आदमी की तरह सफर करते दिखे. वहीं गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल का काफिला तो 5 गुना छोटा हो गया है. बिना किसी जैमर या एस्कॉर्ट के वे महज 3 गाड़ियों के साथ अपने आवास पहुंचे.
मध्य प्रदेश में मंत्री विश्वास सारंग बिना पायलट वाहन के दफ्तर जा रहे हैं और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वाहन रैलियों पर पूरी तरह रोक लगा दी है. महाराष्ट्र की बात करें को वहां फडणवीस सरकार ने मंत्रियों की विदेश यात्राओं पर कैंची चला दी है. वहीं, विधान परिषद के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अपना जापान दौरा ही रद्द कर दिया. हद तो तब हो गई जब प्रेरणा का यह सिलसिला न्यायपालिका तक पहुंच गया; औरंगाबाद के जिला जज राजीव रंजन कुमार खुद साइकिल चलाकर कोर्ट पहुंचे! ऐसे में यह मुहिम अब सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रही है. इसके पीछे कई कारण है....
नई खरीद के बजाय मौजूदा ई-व्हीकल्स का अधिकतम उपयोग.
सरकारी खर्च और समय बचाने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता.
मेट्रो, बस और साइकिलिंग को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान.
विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए 'गोल्ड' और 'फॉरेन ट्रिप' पर संयम.
देखा जाए तो प्रधानमंत्री मोदी की एक छोटी सी अपील ने देश के मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और जजों को जमीन पर लाकर खड़ा कर दिया है. जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग अपनी सुख-सुविधाएं त्यागकर बस, मेट्रो और साइकिल का सहारा लेते हैं, तो यह संदेश आम जनता के दिल तक पहुंचता है. आज पूरा देश एक सुर में कह रहा है कि "ईंधन बचाओ, देश बचाओ." अगर इसी रफ्तार से यह मुहिम आगे बढ़ी, तो भारत न केवल वैश्विक ऊर्जा संकट से उबरेगा, बल्कि दुनिया के सामने पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा रोल मॉडल बनकर उभरेगा. यह बदलता हुआ भारत है, जो अपने प्रधान सेवक के कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है!


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