प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का श्रीलंका दौरा: द्विपक्षीय संबंधों में नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में श्रीलंका के तीन दिन के महत्वपूर्ण दौरे पर कदम रखा, जहां उन्होंने श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इस दौरे में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई, जिनमें विशेष रूप से भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी और तमिल मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "यह मछुआरों की आजीविका का मुद्दा है।" मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देशों को इस मामले में मानवता के दृष्टिकोण से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने श्रीलंकाई राष्ट्रपति के साथ सहमति जताई कि मछुआरों को तुरंत रिहा किया जाए और उनकी नावों को भी छोड़ दिया जाए ताकि उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।यह मुद्दा दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव का कारण बनता रहा है, लेकिन इस बार पीएम मोदी के कूटनीतिक प्रयासों से उम्मीद है कि इसमें सकारात्मक बदलाव आएगा।

पीएम मोदी ने श्रीलंका में तमिल समुदाय के अधिकारों पर भी स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "मुझे यकीन है कि श्रीलंका सरकार तमिलों की उम्मीदों को पूरा करेगी और श्रीलंका के संविधान के तहत मिले पूरे अधिकारों को लागू करेगी।" यह बयान श्रीलंका के तमिलों के राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के संदर्भ में अहम है, खासकर जब यह मुद्दा दशकों से संवेदनशील रहा है।

भारत ने हमेशा से श्रीलंका में तमिलों के अधिकारों के लिए समर्थन किया है, और पीएम मोदी के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत इस मुद्दे पर अपनी स्थिति को लेकर दृढ़ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि यह भारत-श्रीलंका के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। मछुआरों के मुद्दे और तमिलों के अधिकारों के अलावा, इस दौरे में आर्थिक सहयोग, व्यापार, और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

उम्मीद है कि इस दौरे के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में नई ऊर्जा आएगी, और महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय नीतियों में मानवता और सम्मान को सर्वोपरि रखता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का श्रीलंका दौरा भारत-श्रीलंका संबंधों के नए युग की शुरुआत हो सकता है, जहां मानवता, सहयोग और आपसी समझदारी पर जोर दिया जाएगा। यह दोनों देशों के बीच स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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