कवि प्रदीप भारतीय कवि एवं गीतकार थे जो देशभक्ति गीत ऐ मेरे वतन के लोगों की रचना के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों की श्रद्धांजलि में ये गीत लिखा था. जिसे लता मंगेशकर द्वारा गाए इस गीत का तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में 26 जनवरी 1963 को दिल्ली के रामलीला मैदान में सीधा प्रसारण किया गया था. गीत सुनकर जवाहरलाल नेहरू के आंख भर आए थे. कवि प्रदीप ने इस गीत का राजस्व युद्ध विधवा कोष में जमा करने की अपील की. आइए पढ़ते हैं कवि प्रदीप की यह कविता..
गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किस लिए
चार चांद लग गये हैं तेरे-मेरे प्यार में इस लिए
आ गया आँचल किसी का आज मेरे हाथ में
है चकोरी आज अपने चँद्रमा के साथ में
चल पडी दो किश्तीयाँ आज एक धार में किस लिए
चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इसलिए
गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किसलिए
चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इसलिए
छू रही तन मन को मेरे प्रीत की पुर्वाईयाँ
दूर की अम्ब्राईओं में गुँजती शेहनाईयाँ
सौ गुना निखार है आज तो सिंगार में किस लिए
चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इसलिए
गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किस लिए
चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इस लिए
ज़िंदगी भर के लिए तू बाँह मेरी थाम ले
जब तलक ये साँस है हर साँस तेरा नाम ले
इक नयी दुनिया खड़ी अपने इंतज़ार में किस लिए
चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इसलिए
गा रही है ज़िंदगी हर तरफ़ बहार में किस लिए
चार चांद लग गये हैं तेरे मेरे प्यार में इसलिए
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