अखिलेश को पूड़ी खिलाई, तो पिता को 'सुपरवाइजर' से 'सफाईकर्मी' बनाया!

क्या यूपी में अब किसी नेता को पूड़ी खिलाना गुनाह हो गया है? क्या किसी विपक्ष के नेता का आदर करना नौकरी छीनने की वजह बन सकता है? जी हां, लखनऊ के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने सत्ता की हनक और विपक्ष के आक्रोश को आमने-सामने खड़ा कर दिया है! 14 अप्रैल को बाबा साहब की जयंती पर एक बेटी ने बड़े चाव से अखिलेश यादव को अपने हाथ से बनी पूड़ी और सब्जी खिलाई थी। उस वक्त उस परिवार की आंखों में चमक थी, चेहरे पर मुस्कान थी कि प्रदेश का एक बड़ा नेता उनके द्वार आया है। लेकिन उस एक निवाले की कीमत क्या इतनी बड़ी होगी, ये किसी ने नहीं सोचा था! दरअसल, आरोप है कि अखिलेश यादव के जाते ही सिस्टम का हंटर चला और अंजलि मैसी के पिता, जो कैंटोनमेंट बोर्ड में सुपरवाइजर थे, उन्हें रातों-रात डिमोट करके सफाई कर्मचारी बना दिया गया! ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या ये अनुशासनहीनता है या सीधे-सीधे सियासी इंतकाम? एक तरफ अखिलेश यादव दहाड़ रहे हैं कि बीजेपी अंग्रेजों से भी बदतर राजनीति कर रही है, तो दूसरी तरफ प्रशासन फाइलों का हवाला देकर कह रहा है कि नियम टूटे हैं!
आइए जानते हैं। 

दरअसल, बात 14 अप्रैल की है, जब पूरा देश डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती मना रहा था। लखनऊ के कैंट इलाके में रहने वाली अंजलि मैसी और उनके पिता उमेश कुमार ने बाबा साहब की याद में एक भंडारे का आयोजन किया था। इसी दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पास के ही सदर गुरुद्वारे में मत्था टेकने आए थे। गुरुद्वारे से निकलते समय अंजलि ने उत्साहवश अखिलेश यादव को रोक लिया और उनसे भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया। अखिलेश यादव गाड़ी से उतरे, जमीन पर बैठकर पूड़ी-सब्जी खाई और अंजलि के परिवार की सराहना की। वहीं इस घटना के कुछ समय बाद ही अंजलि मैसी अचानक सपा मुख्यालय पहुंचीं। वहां चल रही प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच में ही वह भावुक हो गईं और आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के उनके हाथ की पूड़ी खाने की सजा उनके पिता को भुगतनी पड़ रही है। अंजलि का दावा है कि उनके पिता उमेश कुमार, जो छावनी परिषद में सुपरवाइजर के पद पर थे, उन्हें रातों-रात डिमोट करके सफाई कर्मचारी बना दिया गया। अंजलि ने भरे गले से कहा, "सर, मैं बीजेपी की धांधली दिखाना चाहती हूं। आपके लिए ऐसी 100 नौकरियां कुर्बान हैं, मेरे पिता ने भी यही संदेश भेजा है।

वहीं इस मामले को लपकते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे PDA समाज का अपमान बताया। अखिलेश ने लिखा कि बीजेपी सरकार इतनी संकीर्ण मानसिकता की है कि एक बेटी के घर प्रसाद खाने पर उसके पिता को प्रताड़ित किया जा रहा है। 

उन्होंने इसकी तुलना अंग्रेजों के शासन से करते हुए कहा कि इतनी निकृष्ट राजनीति तो गोरों ने भी नहीं की थी। अखिलेश ने फतेहपुर के उस चायवाले का भी जिक्र किया, जिसकी दुकान पर उनके चाय पीने के बाद छापेमारी की गई थी। वहीं दूसरी तरफ मामला तूल पकड़ते देख छावनी परिषद के अधिकारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उनका कहना है कि उमेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई अखिलेश यादव को खाना खिलाने के कारण नहीं, बल्कि सेवा आचरण नियमावली के उल्लंघन की वजह से हुई है। अधिकारियों के मुताबिक उमेश कुमार ने बिना विभाग की अनुमति के रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को सीधे निमंत्रण पत्र भेज दिए थे, जो प्रोटोकॉल के खिलाफ है। 

बोर्ड का दावा है कि उमेश कुमार मूल रूप से सफाई कर्मचारी के पद पर ही तैनात हैं, उन्हें सिर्फ अस्थायी तौर पर निगरानी का काम दिया गया था। अब उन्हें वापस उनके मूल पद पर भेजा गया है, जिसे डिमोशन कहना गलत है। उन्हें अनुशासनहीनता के चलते गेट ड्यूटी से हटाकर स्कूल में तैनात किया गया है। आपको बता दें अखिलेश यादव ने इस घटना को एक पुरानी कड़ी से जोड़ा। कुछ समय पहले फतेहपुर में अखिलेश ने एक स्थानीय दुकानदार की दुकान पर चाय पी थी। उसके तुरंत बाद खाद्य विभाग ने एल्युमिनियम के बर्तन इस्तेमाल करने का आरोप लगाकर दुकानदार का चालान काट दिया था। दहशत में आकर दुकानदार ने दुकान बंद कर दी थी, जिसके बाद अखिलेश ने उसे लखनऊ बुलाकर पीतल के बर्तन भेंट किए थे और सम्मानित किया था।

वहीं उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह मामला अब सिंबल बन गया है। अंजलि मैसी का कहना है कि उनके पिता का अपमान सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने सपा मुखिया को अपना सर्वश्रेष्ठ नेता माना। वहीं, बीजेपी समर्थित प्रशासन इसे नियमों का हवाला देकर जायज ठहरा रहा है। खैर सच्चाई जो भी हो, लेकिन लखनऊ की गलियों में फिलहाल एक ही सवाल तैर रहा है कि क्या वाकई एक पूड़ी खिलाना इतना महंगा पड़ सकता है? अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि वह इस लड़ाई को बड़े अधिकारियों तक ले जाएंगे, जबकि अंजलि के तेवर बता रहे हैं कि वह झुकने को तैयार नहीं हैं। यूपी की राजनीति में अब साइकिल और कमल के बीच यह भंडारा विवाद आने वाले दिनों में और भी सुर्खियां बटोरने वाला है। 

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