उत्तर प्रदेश में चढ़ा सियासी पारा, भाजपाईयों ने फूंका अखिलेश का पुतला...
उत्तर प्रदेश में की सियासत उस वक्त गरमा गई जब समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल की ओर से उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक को लेकर एक तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। इस पोस्ट के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मामला बृजेश पाठक से जुड़ा होने के कारण मामले ने देखते ही देखते इतना तूल पकड़ लिया कि सपा मुखिया अखिलेश यादव को खुद सामने आना पड़ गया है।
अखिलेश यादव ने बृजेश पाठक को मर्यादा में रहने की नसीहत दी-
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ना केवल अपने कार्यकर्ताओं को संयम बरतने की सलाह दी, बल्कि उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को भी मर्यादा में रहने की नसीहत दे डाली है। साथ ही अखिलेश यादव ने बृजेश पाठक से कहा कि आप अपनी टिप्पणी के लिए अपने अंदर बैठे हुए उस अच्छे इंसान से क्षमा मांगेंगे, जो पहले ऐसा न था। दरअसल सपा मीडिया सेल ने एक्स पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को लेकर तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणी की है। जिसने राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी।
मामला बढ़ता देख अब खुद अखिलेश यादव बचाव करने आ गए हैं। अखिलेश यादव ने सपा मीडिया सेल की ओर से आई प्रतिक्रिया को लेकर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखते हुए पूरे विवाद पर अपनी पहली औपचारिक प्रतिक्रिया दी।
अखिलेश यादव ने बताया कि उन्होंने पार्टी स्तर पर उन लोगों को समझाने का प्रयास किया है जो ब्रजेश पाठक की 'डीएनए' टिप्पणी से आहत होकर भावनाओं में बह गए थे। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसा दोबारा न हो, इसके लिए पार्टी स्तर पर ज़रूरी संवाद किया गया है। वहीं अखिलेश यादव ने ब्रजेश पाठक से भी आशा जताई कि वे भविष्य में ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे, जो न केवल उनके पद की गरिमा के खिलाफ है। बल्कि समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को भी आहत करता है।
यदुवंश का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है-सपा मुखिया
सपा मुखिया ने खुद को यदुवंशी बताते हुए कहा कि यदुवंश का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है और इस प्रकार डीएनए पर की गई टिप्पणी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी परंपरा और आस्था पर हमला है। उन्होंने लिखा कि एक आम धार्मिक व्यक्ति भी इसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी समझ सकता है।
साथ ही अखिलेश यादव ने ब्रजेश पाठक को याद दिलाया कि वह एक जनसेवक हैं और स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारियां बड़ी हैं। उन्हें अपनी भाषा पर संयम बरतना चाहिए। उन्होंने यह भी लिखा कि अगर उपमुख्यमंत्री एकांत में बैठकर अपने विगत व्यवहार का आत्मनिरीक्षण करें, तो उन्हें स्वयं अपने अंदर आए बदलाव का एहसास होगा। इस प्रतिक्रिया के साथ सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मामले को शांत करने की कोशिश तो की है, लेकिन सियासी बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में यह प्रकरण अभी और लंबा खिंच सकता है। लखनऊ के हजरतगंज थाने में सपा मीडिया सेल के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो गया है। बृजेश पाठक के समर्थकों ने अखिलेश यादव का पुतला भी फूंका है।

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