घर में आए दिन होने वाले लड़ाई-झगड़े से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है गलत प्रभाव
वैसे तो थोड़ी बहुत नोकझोक तो हर रिश्ते में होती है अगर यही नोकझोक रोज रोज होती रहे है तो यह घर को बर्बाद होने का करण बन जाता है इसका सबसे ज्यादा असर बच्चो व परिवार पर पड़ता है ये जरा भी नहीं सोचते, कि इससे उनके बच्चे को कितना नुकसान पहुंचता है। पति-पत्नी के बीच हल्की नोकझोंक जब बढ़कर झगड़े का रूप ले ले, तो उनकी इस लड़ाई का शिकार सबसे पहले बच्चे बनते हैं। लेकिन बता दें, कि बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए घर का माहौल सही होना बहुत जरूरी है। साथ ही अपने पैरेंट्स से अच्छी बॉन्डिंग होना भी उतनी ही जरूरी है। लेकिन यदि आप दोनों के बीच अक्सर लड़ाई झगड़े होते रहते हैं ..आइए जानते हैं रोजाना घर में होने वाले लड़ाई- झगड़ों का किस तरह से प्रभाव बच्चों पर पड़ता है।
व्यक्ति का व्यवहार
लड़ाई-झगड़ों के दौरान हिंसक होना, एक-दूसरे को दोष देना, झूठ बोलना, अपशब्दों का प्रयोग जैसी चीज़ें लोग करते ही हैं, तो न चाहते हुए भी बच्चा ये सारी चीज़ें सीख जाता है। उसे मारने-पीटने, गालियां देने में कोई बुराई नजर नहीं आती। बचपन में अपने उम्र के लोगों के साथ तो वो ऐसा करते हैं और बड़ा होने के बाद अपने पार्टनर के साथ। इस तरह के बिहेवियर के लिए पूरी तरह से मां-बाप ही जिम्मेदार होते हैं।
मानसिक परेशानी
माता-पिता की गलतियों की सजा अक्सर बच्चों को ही भुगतनी पड़ती है। बचपन से ही तंग माहौल में रहने से बच्चा मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है। उसका दिमाग कमजोर हो जाता है। उनका बचपन चिंता और रोते- धोते ही निकलता है। पैरेंट्स के बीच लड़ाई झगड़े ज्यादा हों, तो ऐसे बच्चे पढ़ाई में बहुत कमजोर भी हो जाते हैं।
ईटिंग डिसऑर्डर
घर में आए दिन होने वाले झगड़ों से बच्चे ईटिंग डिसऑर्डर का भी शिकार हो सकते हैं। जिसमें या तो उन्हें भूख ही नहीं लगती, खाने का दिल नहीं करता या फिर उनका खाने-पीने पर कोई कंट्रोल ही नहीं रहता। वैसे ज्यादा चांसेज भूख न लगने के होते हैं। बच्चों में खाने का ये डिसऑर्डर वैसे काफी आम है, लेकिन दोनों ही डिसऑर्डर बच्चे के लिए खतरनाक हैं। कम खाने से शरीर में न्यूट्रिशन की कमी, तो वहीं ज्यादा खाने से मोटापे की प्रॉब्लम हो सकती है। जो और कई सेहत संबंधी परेशानियों की वजह बन सकते हैं।
धूम्रपान का सेवन
घर में कलेश का माहौल बच्चों को धूम्रपान की ओर भी धकेल सकता है। बच्चों को लगता है कि उनके अंदर पनप रहे गुस्से, दर्द को ये सारी चीज़ें शांत कर सकती हैं। बचपन से ही इन चीज़ों की लत लग जाती है जो उनकी पूरी जिंदगी को खराब कर सकती है। शरीर के साथ ही दिमाग पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।
स्कूल में खराब प्रदर्शन
घर में अगर आपका बच्चा हर वक्त गुस्से और तनाव में रहता है, तो इसका असर उनके पढ़ाई पर भी पड़ता है। वो अपनी पढ़ाई और करियर पर फोकस नहीं कर पाता। बाकी बच्चों की तुलना में उसका डेवलपमेंट भी स्लो हो जाता है। ये भी एक अलग तरह का स्ट्रेस है। इन सबका नेगेटिव असर बच्चों पर पड़ता है।

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