प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस में राहुल राज सिंह आरोपमुक्त, आखिरी कॉल बनी अहम कड़ी
AKANSHA UPADHYAY
टीवी की मशहूर एक्ट्रेस और ‘बालिका वधू’ फेम प्रत्युषा बनर्जी की मौत से जुड़े करीब 10 साल पुराने मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक्टर-प्रोड्यूसर राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त कर दिया है। बुधवार, 30 सितंबर को अदालत ने राहुल के खिलाफ चल रही कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाया। राहुल पर प्रत्युषा को आत्महत्या के लिए उकसाने और उन्हें मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए थे।
इस पूरे मामले में राहुल और प्रत्युषा के बीच हुई आखिरी फोन बातचीत को अदालत के सामने अहम सबूत के तौर पर पेश किया गया। जस्टिस शिवकुमार डिगे की बेंच ने इस बातचीत की रिकॉर्डिंग और उसके ट्रांसक्रिप्ट पर गौर किया। अदालत के मुताबिक, बातचीत से यह सामने आया कि राहुल प्रत्युषा को कोई बड़ा कदम उठाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने प्रत्युषा से कहा था कि वह उनसे मिलने के लिए अपनी कार वापस मोड़ चुके हैं।
बचाव पक्ष की ओर से पेश वकील आबाद पोंडा और श्रेयांस मिठारे ने भी इसी बातचीत को अपनी दलील का महत्वपूर्ण आधार बनाया। वकीलों ने कहा कि आखिरी कॉल से यह संकेत मिलता है कि राहुल प्रत्युषा को समझाने और उनसे मिलने की कोशिश कर रहे थे। बातचीत के दौरान प्रत्युषा अपनी परेशानियों और परिस्थितियों के लिए कई लोगों को जिम्मेदार ठहरा रही थीं। इनमें उनके माता-पिता का भी जिक्र सामने आया।
प्रत्युषा बनर्जी 1 अप्रैल 2016 को मुंबई स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत पाई गई थीं। वह टीवी शो ‘बालिका वधू’ में आनंदी का किरदार निभाकर घर-घर लोकप्रिय हुई थीं। उनकी मौत के बाद उनके माता-पिता ने राहुल राज सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। दोनों उस समय कथित तौर पर लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे।मामले की जांच के दौरान राहुल पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया। राहुल ने निचली अदालत की कार्रवाई को चुनौती दी थी। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि इसी आखिरी फोन बातचीत के आधार पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2016 में राहुल को अग्रिम जमानत दी थी।अब करीब एक दशक बाद हाई कोर्ट के इस फैसले से राहुल राज सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत के फैसले में आखिरी बातचीत की सामग्री और मामले में उपलब्ध सबूतों की अहम भूमिका रही।

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