नगर निगम ने 30,000 से ज़्यादा प्रॉपर्टी मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला

प्रयागराज :  प्रयागराज नगर निगम ने 30,000 से ज़्यादा प्रॉपर्टी मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला किया है, जिन्होंने पिछले तीन साल या उससे ज़्यादा समय से अपना हाउस टैक्स नहीं भरा है।

बिजली, पानी, सड़क और ड्रेनेज की सुविधा होने के बावजूद, इन प्रॉपर्टी मालिकों ने हाउस टैक्स नहीं भरा है। अधिकारियों के मुताबिक, इन डिफॉल्टरों पर बकाया हाउस टैक्स की रकम अब 15-20 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गई है।

निगम की तरफ से बार-बार भेजे गए रिमाइंडर और नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला, जिससे अधिकारियों को और सख्त रिकवरी सिस्टम लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा। अब, नगर निगम ऐसे सभी डिफॉल्टरों को डिमांड नोटिस जारी करना शुरू करेगा। अगर नोटिस में तय समय के अंदर बकाया नहीं चुकाया जाता है, तो निगम उनके खिलाफ प्रॉपर्टी सीज (कुर्की) की कार्रवाई शुरू करेगा।

निगम ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 150 करोड़ रुपये हाउस टैक्स इकट्ठा करने का बड़ा टारगेट रखा है। 100 नगर निगम वार्डों में लगभग 4.15 लाख रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी यूनिट हैं। इनमें से 2.36 लाख प्रॉपर्टी पुराने 80 वार्ड में आती हैं, और इन इलाकों के 1.40 लाख से ज़्यादा मालिकों ने पहले ही अपना बकाया चुका दिया है। अब तक, कॉर्पोरेशन ने हाउस टैक्स के तौर पर 58 करोड़ रुपये से ज़्यादा वसूले हैं।

नए बढ़े हुए म्युनिसिपल इलाकों में, अधिकारियों ने और 1.79 लाख प्रॉपर्टी यूनिट की पहचान की है। इन घरों को भी नोटिस और टैक्स बिल भेजे जा रहे हैं। चीफ टैक्स असेसमेंट ऑफिसर पीके मिश्रा ने कहा कि कॉर्पोरेशन का मकसद इस साल करीब 84,000 प्रॉपर्टी मालिकों से बकाया वसूलना है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि कॉर्पोरेशन उन इलाकों से हाउस टैक्स नहीं वसूलेगा जहां बिजली, पानी की सप्लाई, पक्की सड़कें और ड्रेनेज सिस्टम जैसी बेसिक नागरिक सुविधाएं अभी भी नहीं हैं।

अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हालांकि हजारों लोग शहर की ज़रूरी सेवाओं का फ़ायदा उठा रहे हैं, लेकिन हाउस टैक्स न देने से डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और पब्लिक वेलफेयर स्कीम पर बेवजह दबाव पड़ रहा है।

रिपोर्टर : जाबिर अली 

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