भ्रष्टाचार की 'ईंट' और बदहाली का 'गारा': कछौना में कागजों पर दौड़ रहा स्वच्छता अभियान, धरातल पर दरक रहे RRC सेंटर
कछौना : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं हरदोई के विकासखण्ड-कछौना में भ्रष्ट तंत्र इस नीति की धज्जियां उड़ाने में मस्त है। विकास के नाम पर लाखों रुपये 'डस्टबिन' में डाले जा रहे हैं। मामला कूड़ा निस्तारण का है, लेकिन हकीकत यह है कि यहाँ रिसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) खुद भ्रष्टाचार के मलबे में तब्दील हो चुके हैं।
सरकारी खजाने पर डाका: मानक ताक पर, जेबें गरम
कछौना ब्लॉक की ग्राम पंचायत बाण में बना RRC सेंटर भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बन गया है। लाखों की लागत से खड़ा किया गया यह ढांचा चंद महीनों में ही 'जवाब' देने लगा है। भवन की दीवारों में आई गहरी दरारें और उखड़ता फर्श चीख-चीख कर निर्माण में इस्तेमाल की गई घटिया सामग्री की गवाही दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के समय ही धांधली की शिकायत की गई थी, लेकिन 'ऊपर' तक तालमेल ऐसा बैठा कि अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं।
शो-पीस बना कूड़ाघर, गांव में गंदगी का अंबार
जिस सेंटर को गांव को कचरा मुक्त बनाना था, वह आज खुद एक 'सफेद हाथी' साबित हो रहा है। रिकॉर्ड में सेंटर चालू है, लेकिन धरातल पर ताला लटका है। गांव की गलियों में आज भी कूड़े के ढेर लगे हैं। सचिव, अभियंता और ठेकेदार के 'नेक्सस' ने मिलकर बजट का बंदरबांट कर लिया।
यह सिर्फ ईंट-गारे का भ्रष्टाचार नहीं है, यह जनता के भरोसे और सरकार की छवि के साथ खिलवाड़ है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो विकास की उम्मीद किससे करें?" — स्थानीय ग्रामीण
मामला तूल पकड़ने के बाद जिले के आला अधिकारियों तक पहुंच गया है। खंड विकास अधिकारी (BDO) महेश चंद्र ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं स्थलीय निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की बात कही है। अब देखना यह होगा कि क्या दोषी सचिव और ठेकेदार पर वाकई गाज गिरेगी या फिर एक और 'जांच' फाइलों में दबकर रह जाएगी।
रिपोर्टर : अनुराग सिंह

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