प्रयागराज में अक्षय तृतीया महापर्व हर्षोल्लास से संपन्न
प्रयागराज - जैन धर्म के दानतीर्थ प्रवर्तक महापर्व ‘अक्षय तृतीया’ का आयोजन जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्री दिगम्बर जैन पंचायती सभा प्रयागराज के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और दिनभर धर्माराधना में लीन रहे। पर्व का आयोजन मुनि श्री 108 वासुपूज्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 अतुल सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। प्रातःकाल मंदिर में अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक भगवान की आराधना की।
जैन परंपरा में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को राजा श्रेयांस द्वारा इक्षुरस (गन्ने का रस) का प्रथम आहार अर्पित किया गया था, जिससे दान की पवित्र परंपरा का शुभारंभ हुआ। इसी कारण यह पर्व दान, त्याग और संयम की प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर भक्तामर जी विधान का भव्य आयोजन किया गया जिसमें मंत्रोच्चार, स्तुति एवं विधि-विधान के साथ भगवान की आराधना की गई। विधान के दौरान मंदिर परिसर भक्ति रस में डूबा नजर आया और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मुनिश्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि अक्षय तृतीया केवल दान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार का संदेश देने वाला महापर्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में अहिंसा, अपरिग्रह और सेवा भाव अपनाने का आह्वान किया। पर्व के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने दान, संयम और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। संपूर्ण आयोजन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया।
रिपोर्टर - जाबिर अली


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