प्रयागराज रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित मस्जिद पर ध्वस्तीकरण नोटिस से मचा हड़कंप

प्रयागराज : प्रयागराज जंक्शन रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित एक ऐतिहासिक मस्जिद को दिए गए ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) नोटिस के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। समस्त अधिवक्ताओं द्वारा इस गंभीर मामले को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

ज्ञापन में बताया गया है कि यह मस्जिद ब्रिटिश कालीन है और तब से लेकर आज तक यहाँ लगातार पाँच वक्त की नमाज अदा की जाती रही है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है।
अधिवक्ताओं ने अपने ज्ञापन में विशेष रूप से उल्लेख किया है कि यह मस्जिद वर्ष 1950 में वक्फ बोर्ड में क्रम संख्या 161 पर विधिवत दर्ज है, जिससे इसकी वैधानिक स्थिति और अधिकार पूरी तरह स्थापित होते हैं।
प्रेस को दी गई जानकारी के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण/विकास महान स्वतंत्रता सेनानी एवं मेजर शाहनवाज खान के संरक्षण में हुआ था। वे आज़ाद हिंद फौज के अधिकारी रहे और स्वतंत्र भारत में 1952 से 1964 तक रेलवे मंत्रालय में उप मंत्री के पद पर रहे। उनके योगदान के चलते यह मस्जिद ऐतिहासिक महत्व भी रखती है।
समस्त अधिवक्ताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि “वक्फ बोर्ड में दर्ज और वर्षों से संचालित इस ऐतिहासिक मस्जिद को ध्वस्त करने का नोटिस देना कानून और न्याय के विरुद्ध है। इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की गई :

ध्वस्तीकरण नोटिस को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

मस्जिद को ऐतिहासिक धरोहर घोषित कर संरक्षण दिया जाए।

वक्फ संपत्ति के रूप में उसके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में शीघ्र न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिया गया, तो वे व्यापक स्तर पर कानूनी लड़ाई और जन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में कॉफी चर्चाएं है और आमजन में भी इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता और आक्रोश है।

रिपोर्टर : जाबिर अली 

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