पूर्व प्रधानाचार्य डेविड ल्यूक के खिलाफ ई.ओ.डब्ल्यू. ने दर्ज की प्राथमिकी

प्रयागराज - उत्तर प्रदेश के ईसाई चर्च से जुड़े 200 साल पुराने और प्रतिष्ठित ब्वायज हाईस्कूल एंड कॉलेज में शिक्षण शुल्क के गबन का बड़ा घोटाला सामने आया है। आर्थिक अपराध शाखा (ई.ओ.डब्ल्यू.) लखनऊ सेक्टर ने विद्यालय के बर्खास्त कार्यवाहक प्रधानाचार्य डेविड ए. ल्यूक के खिलाफ थाना लखनऊ सेक्टर (ई.ओ.डब्ल्यू.) में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। ई.ओ.डब्ल्यू. की जांच में अभी तक लगभग 10 करोड़ रुपये के गबन का प्रमाणित मामला पाया गया है, जबकि मूल शिकायत में कुल 45 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगा है।

मुख्य आरोप और जांच की एजेंसी की भूमिका ई.ओ.डब्ल्यू. की FIR में बताया गया है कि डेविड ल्यूक ने 2014 से 2021 के बीच विद्यालय के शिक्षण शुल्क और निर्माण कार्य से जुड़े धनराशि का गलत इस्तेमाल किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने बिना प्रबंधन समिति की मंजूरी के कई निर्माण कंपनियों के जरिए लगभग 10 करोड़ रुपये डायवर्ट किए, जिसमें कृष्णा इंटरप्राइजे,रिमूर्ति कान्स्ट्रक्शन और रंजन इंटरप्राइजेज शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने विद्यालय के खाते से महंगी गाड़ियां खरीदीं और एक इनोवा कार (यूपी 70 बीएन 8812) को 27 अगस्त 2024 को निजी फायदे के लिए बेच दिया। इस मामले में ई.ओ.डब्ल्यू. ने जांच अधिकारी नरेन्द्र सिंह को नियुक्त किया है,जिन्होंने बिशप मोरिश एडगर दान की शिकायत पर FIR दर्ज कराई। धर्मी प्राधिकरण की भूमिका और शिक्षण संस्थान की गरिमा बिशप मोरिश एडगर दान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 23 अप्रैल 2026 को एक खुले पत्र में गबन के प्रमाणित साक्ष्य देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने बताया कि ब्वायज हाईस्कूल इलाहाबाद हाईस्कूल सोसाइटी के तहत संचालित है, जिसका अध्यक्ष वह हैं। ल्यूक पर इससे पहले भी फर्जी एम.ए. डिग्री और 3.25 करोड़ रुपये के गबन के आरोप लग चुके हैं, जिसके बाद उन्हें जून 2025 में बर्खास्त किया गया था। ई.ओ.डब्ल्यू. की रिपोर्ट के अनुसार,ल्यूक ने निर्माण कार्यों से संबंधित कोई अभिलेख या नक्शा नगर निगम से स्वीकृत नहीं कराया, जिससे शिक्षण संस्थान की गरिमा और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा खतरे में पड़ी।

संदेश और आगे की कार्रवाई इस मामले में समाचार पत्रों से अपील की गई है कि वे इस घोटाले को व्यापक स्तर पर प्रकाशित करें ताकि जनता शिक्षण संस्थानों की वित्तीय निगरानी में अधिक सक्रिय हो सके। ई.ओ.डब्ल्यू.ने घटना को धारा 173 बी.एन.एस. के तहत दर्ज किया है, जिसमें जांच अभी जारी है और अधिकारी ल्यूक के परिवार और संलग्न ठेकेदारों के वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रहे हैं। इस घटना से उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं,और शिक्षा विभाग को अब संस्थानों की वित्तीय रिपोर्टिंग में कड़ी मानक लागू करनी होगी।

रिपोर्टर - जाबिर अली 

 

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