कर्बला की प्यास को किया ज़िंदा, भीषण गर्मी में सानू असरावे की सबील बनी राहत का दरिया

प्रयागराज - मोहर्रम के ग़मगीन माहौल और आसमान से बरसती आग के बीच प्रयागराज के असरावल कलां में इंसानियत, सेवा और सामाजिक सौहार्द की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने हर गुजरने वाले का दिल छू लिया। एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी सानू असरावे ने कर्बला के शहीदों की याद में विभिन्न प्रमुख स्थानों पर ठंडे शरबत की सबील लगाकर न सिर्फ राहगीरों की प्यास बुझाई, बल्कि कर्बला के उस अमर संदेश को भी जीवंत कर दिया, जो मानवता, त्याग और इंसाफ की सीख देता है। इन दिनों मोहर्रम के अवसर पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मजलिस, मातम, जुलूस और ताजियादारी का दौर जारी है। दूर-दराज़ के गांवों से लोग धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए निकल रहे हैं। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से समाजसेवी सानू असरावे ने जगह-जगह शरबत की व्यवस्था कराई और स्वयं घंटों खड़े रहकर आने-जाने वालों को अपने हाथों से ठंडा शरबत पिलाया। सानू असरावे ने कहा कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल है। हज़रत इमाम हुसैन ने अत्याचार और अन्याय के खिलाफ अपने परिवार और साथियों सहित कुर्बानी देकर दुनिया को इंसाफ, सत्य और मानवता का संदेश दिया। उन्हीं की याद में यह सबील लगाई गई है ताकि लोगों तक सेवा और भाईचारे का पैगाम पहुंचे। सबील स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर शरबत ग्रहण किया और इस नेक पहल की सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भीषण गर्मी में लोग प्यास से परेशान हों, ऐसे समय में नि:स्वार्थ भाव से सेवा करना वास्तव में कर्बला के संदेश को आत्मसात करना है। मोहर्रम के पावन अवसर पर सानू असरावे द्वारा आयोजित यह सबील केवल शरबत वितरण का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह मानवता, करुणा और सामाजिक एकता का ऐसा संदेश बन गया, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। कर्बला के शहीदों की याद में उठाया गया यह कदम लोगों के लिए राहत का सहारा और इंसानियत का प्रेरणास्रोत बनकर सामने आया।

रिपोर्टर - जाबिर अली

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