व्यापारी को अपराधी समझने का दौर खत्म हो अब UPI MDR पर भी सरकार सुने व्यापारियों की आवाज

प्रयागराज : 57वीं GST काउंसिल की बैठक में व्यापारियों को राहत देने वाले प्रस्तावों का प्रयागराज व्यापार मंडल ने स्वागत किया है। GST अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों पर अंकुश, अभियोजन की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ किए जाने, ईमानदार खरीदारों को राहत तथा छोटे GST विवादों में नोटिस प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे प्रस्तावों को व्यापारी हित में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए संगठन ने सरकार से अब UPI MDR के मुद्दे पर भी व्यापारियों की आवाज सुनने की मांग की है।

प्रयागराज व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष सुशांत कुमार केसरवानी एवं प्रदेश संयोजक मनीष कुमार गुप्ता ने संयुक्त बयान में कहा कि व्यापारी सरकार के लिए राजस्व जुटाने में भागीदार है, अपराधी नहीं। लंबे समय से व्यापारियों की यह चिंता रही है कि टैक्स संबंधी विवादों में गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई का भय व्यापारिक वातावरण को प्रभावित करता है।

दोनों नेताओं ने कहा कि GST अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों पर अंकुश लगाने तथा अभियोजन की सीमा ₹5 करोड़ करने का निर्णय व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत की दिशा है। इससे विशेष रूप से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर आपराधिक मुकदमे का जोखिम कम होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि टैक्स विवाद और जानबूझकर की गई कर चोरी को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। टैक्स, ब्याज और वैधानिक जुर्माने की वसूली की प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन तकनीकी गलती अथवा वास्तविक व्यापारिक विवाद के मामले में व्यापारी को सीधे अपराधी की तरह देखना उचित नहीं है।

ईमानदार खरीदार को भी मिले संरक्षण

व्यापारी नेताओं ने ईमानदार खरीदारों को राहत देने की दिशा में प्रस्तावित बदलाव को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी खरीदार ने वास्तविक खरीद की है, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं और वह कर चोरी या धोखाधड़ी में शामिल नहीं है, तो केवल विक्रेता द्वारा टैक्स जमा न करने की वजह से ईमानदार खरीदार को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। कार्रवाई का मुख्य फोकस वास्तविक डिफॉल्टर पर होना चाहिए।

आगे उन्होंने कहा कि छोटी GST मांगों में अनावश्यक नोटिस से बचाने तथा नोटिस जारी करने से पहले कारोबारी को अपना पक्ष रखने का अवसर देने जैसी व्यवस्था भी व्यापारियों के लिए राहतकारी हो सकती है। इससे GST व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ेगी।

अब UPI MDR पर सरकार स्पष्ट निर्णय ले

सुशांत कुमार केसरवानी एवं मनीष कुमार गुप्ता ने कहा कि GST जैसे महत्वपूर्ण कानून में यदि व्यापारी हित को ध्यान में रखते हुए सुधार किए जा सकते हैं, तो UPI MDR के प्रस्तावित वित्तीय बोझ पर भी सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।

सुशांत कुमार केसरवानी ने आगे कहा की “व्यापारी को डिजिटल भुगतान की सुविधा चाहिए, लेकिन उसके साथ अतिरिक्त लागत का बोझ नहीं। छोटे दुकानदार के लिए प्रत्येक डिजिटल लेनदेन पर MDR उसकी लागत बढ़ाएगा और अंततः इसका प्रभाव उसके व्यापार तथा ग्राहक दोनों पर पड़ सकता है।”

वहीं मनीष कुमार गुप्ता ने कहा कि सरकार और व्यापारियों के बीच संवाद जितना मजबूत होगा, व्यवस्था उतनी ही बेहतर बनेगी। GST में सुधार स्वागत योग्य है, लेकिन व्यापारियों को नोटिस, सर्वे और अनावश्यक जांच से वास्तविक राहत देने के साथ UPI MDR पर भी स्पष्ट और व्यापारी हित में निर्णय आवश्यक है।

दोनों नेताओं ने कहा कि व्यापारी दंड के भय से नहीं, विश्वास और सरल कानून के माध्यम से कर अनुपालन करना चाहता है। सरकार द्वारा GST व्यवस्था में किए जा रहे सुधार इसी विश्वास को और मजबूत करने वाले होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रयागराज व्यापार मंडल व्यापारियों के सम्मान, सुरक्षा, संरक्षण, स्वाभिमान एवं एकता के लिए लगातार आवाज उठाता रहेगा और व्यापारियों से जुड़े प्रत्येक विषय को मजबूती से सरकार और प्रशासन के सामने रखेगा।

इस अवसर पर संगठन के युवा जिलाध्यक्ष प्रियंक कुमार गुप्ता (अंशु), महानगर अध्यक्ष संतोष गुप्ता, जिला वरिष्ठ महामंत्री अखिलेश केसरवानी, जिला वरिष्ठ महामंत्री विजय केसरवानी, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष बनारसी साहू, जिला महामंत्री प्रशांत पांडे, सुशील जायसवाल एवं अतुल जायसवाल ने भी GST सुधारों का स्वागत करते हुए UPI MDR के मुद्दे पर सरकार से व्यापारियों के हित में स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।

रिपोर्टर : जाबिर 

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