आरएलडी में बड़े बदलाव की तैयारी, संगठन विस्तार पर फोकस

भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल एक बार फिर पूरे उत्तर प्रदेश में अपना संगठन मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। चौधरी अजित सिंह के समय से ही पार्टी की यह कोशिश रही है कि वह पश्चिमी यूपी से बाहर निकलकर राज्य भर में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए, लेकिन अब तक उसे इस प्रयास में खास सफलता नहीं मिल सकी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव किए जाएंगे। नए चेहरों को जिम्मेदारियां दी जाएंगी, और एक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। हालांकि, जयंत चौधरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन यूपी अध्यक्ष के नाम को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है।

लखनऊ में 29 अगस्त को अहम बैठक-

इन बदलावों की योजना 29 अगस्त को लखनऊ में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में तैयार की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) त्रिलोक त्यागी करेंगे। बैठक में यह मूल्यांकन किया जाएगा कि 2026 में होने वाले पंचायत चुनावों के मद्देनज़र पार्टी की जमीनी स्थिति क्या है। इसके लिए पार्टी ने जिला इकाइयों से रिपोर्ट भी मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कार्यकर्ता कितना प्रभावी काम कर रहे हैं और कहां सुधार की जरूरत है।

एनडीए में रहकर संगठन मजबूत करना चाहती है पार्टी

आरएलडी के राष्ट्रीय सचिव अनुपम मिश्रा ने कहा है कि पार्टी एनडीए का हिस्सा बने रहते हुए उत्तर प्रदेश में अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है। उनका कहना है कि पार्टी का फोकस अब अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर है ताकि आने वाले चुनावों में उसका प्रदर्शन बेहतर हो सके।

पश्चिमी यूपी से बाहर विस्तार की चुनौती

पार्टी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय के नेतृत्व में आरएलडी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर जाट समुदाय के बीच अच्छी पकड़ बनाई है। लेकिन पार्टी का असर अब भी इसी क्षेत्र और समुदाय तक सीमित है।
मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी को अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए मेहनत करनी होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर आरएलडी एक नया, प्रभावशाली और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व वाला चेहरा लाती है, तो इससे पार्टी को नए क्षेत्रों में विस्तार करने में मदद मिल सकती है।

रामाशीष राय का तीन साल का कार्यकाल पूरा

आरएलडी के मौजूदा यूपी अध्यक्ष रामाशीष राय अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। वह देवरिया के रहने वाले हैं और पहले बीजेपी में सक्रिय थे। 1997 से 2000 तक वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस दौरान वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी थे। 1993 में उन्होंने फाजिलनगर से विधानसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि वे 1,500 वोटों से हार गए थे। उन्होंने 2021 में आरएलडी की सदस्यता ली थी।

पंचायत चुनावों के लिए नए नेताओं की खोज

पार्टी द्वारा जिला स्तर से जानकारी मंगवाने का उद्देश्य यह है कि ऐसे नए, सक्रिय नेताओं की पहचान की जा सके, जो आगामी पंचायत चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। यह बदलाव पार्टी में नई ऊर्जा और नेतृत्व लाने का एक प्रयास है।

बीजेपी भी रखे हुए है नजर

आरएलडी के भीतर हो रहे इन बदलावों पर बीजेपी भी करीबी नजर बनाए हुए है।
बीजेपी चाहती है कि आरएलडी पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं को जोड़ने में सहयोग करे और एनडीए के सामाजिक समीकरण को और मज़बूत बनाए।
बीजेपी यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके सहयोगी दल संगठित और प्रभावी बने रहें ताकि 2026 और आगे के चुनावों में गठबंधन को लाभ मिल सके।

आरएलडी अब केवल एक क्षेत्रीय पार्टी की छवि से बाहर निकलकर राज्यव्यापी राजनीतिक ताकत बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। संगठन में प्रस्तावित बदलाव और नए नेतृत्व की तलाश इस बात का संकेत हैं कि पार्टी मौजूदा सीमाओं को तोड़कर व्यापक जनाधार बनाना चाहती है। आने वाले कुछ महीने पार्टी के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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