लोकसभा में Anti Paper Leak Bill 2026 पेश! अब 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माना
NEET पेपर लीक कांड और दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर उबले गदर के बाद संसद का मॉनसून सत्र अब दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है! पहला हफ्ता हंगामे की भेंट चढ़कर पूरी तरह धुल गया था, लेकिन आज का दिन संसद के इतिहास में सबसे बड़े सियासी संग्राम का गवाह बना है! एक तरफ विपक्ष संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में वेल तक पहुँचकर वोट चोरी से लेकर चंदा चोरी और पुलिस बर्बरता के नारे लगाते हुए अमित शाह के जवाब की मांग कर रहा था...तो दूसरी तरफ मोदी सरकार ने विपक्ष की घेराबंदी को ध्वस्त करते हुए लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026' पेश करके सबसे बड़ा धमाका कर दिया है! पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जब इस बिल को पटल पर रखा, तो मानो पूरे विपक्ष की रातों की नींद उड़ गई! संसद में सिर्फ नारेबाजी ही नहीं हुई...मकर द्वार पर धर्मेंद्र प्रधान का फूलों-टोपियों से जोरदार स्वागत हुआ, तो वहीं राष्ट्रमंडल खेलों के विजेताओं की गूँज भी सुनाई दी! आखिर क्या है एंटी-पेपर लीक कानून 2026 के वो खतरनाक और सख्त प्रावधान, जिसने नकल माफिया की कमर तोड़ने की तैयारी कर ली है? क्यों गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में किरेन रिजिजू और पीयूष गोयल के साथ अर्जेंट हाई-लेवल मीटिंग बुलाई? आइए, जानते हैं।
आज सोमवार को मॉनसून सत्र के दूसरे हफ्ते की शुरुआत होते ही संसद का पारा आसमान छूने लगा। सुबह जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, स्पीकर ओम बिरला ने राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं और उनके कोचों को बधाई देकर सदन का मान बढ़ाया। लेकिन यह शांति ज्यादा देर नहीं टिकी! NEET विवाद और 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के मुद्दे को लेकर कांग्रेस और विपक्षी सांसद वेल में कूद पड़े। विपक्षी सदस्यों ने हाथ में पोस्टर-बैनर थाम रखे थे, जिन पर 'शिक्षा चोरी' से लेकर 'चंदा चोरी' के स्लोगन लिखे थे। स्पीकर ओम बिरला की बार-बार की अपीलों और चेतावनियों का विपक्ष पर कोई असर नहीं हुआ।
वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा में भी विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पेपर लीक को गंभीर केस बताते हुए नियम 267 के तहत चर्चा की मांग की। आपको बता दें भारी हंगामे और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। वहीं दोपहर 12 बजे जैसे ही सदन दोबारा शुरू हुआ, विपक्षी सांसद फिर से नारेबाजी करने लगे। लेकिन मोदी सरकार बैकफुट पर जाने के मूड में बिल्कुल नहीं थी! हंगामे के शोर-शराबे के बीच ही पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 'लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026' लोकसभा के पटल पर पेश कर दिया! संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाथ जोड़कर विपक्ष से अपील की कि "यह देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा बेहद संवेदनशील बिल है। राजनीति छोड़िए, हंगामे से बाहर आइए और इस पर व्यापक चर्चा कीजिए!"
आपको बता दें स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों का नाम लेकर चर्चा में शामिल होने को कहा, लेकिन जब हंगामा शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने शाम 5 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी और सरकार व विपक्ष को आपस में सहमति बनाने की डेडलाइन दे दी। एंटी-पेपर लीक बिल पेश होने के बाद जैसे ही लोकसभा स्थगित हुई, गृह मंत्री अमित शाह एक्शन मोड में आ गए। संसद परिसर के अंदर ही अमित शाह की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल इमरजेंसी मीटिंग हुई। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, पीयूष गोयल और कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे। इस बैठक में विपक्ष के रुख से निपटने और बिल पर चर्चा कराने और आगे की कड़क रणनीति तैयार करने पर मंथन हुआ। आपको बता दें 2024 के पुराने कानून के बावजूद देश भर में हो रही धांधली को देखते हुए सरकार 'सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026' में ऐसे प्रावधान लेकर आई है, जिससे नकल माफिया के रोंगटे खड़े हो जाएंगे। आइए जानते हैं इस नए बिल के 7 सबसे बड़े कारण जिससे पेपर लीक पर लगाम लगेगी।
पर्चा लीक करने या परीक्षा में धांधली करने पर अब सीधी 5 से 10 साल तक की जेल होगी। पहले यह सजा सिर्फ 3 से 5 साल की थी।
दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। पहले यह रकम सिर्फ 10 लाख रुपये तक सीमित थी।
पेपर लीक गैंग, कोचिंग सेंटर या संगठित सिंडिकेट पकड़े जाने पर 10 साल की सख्त कैद और पूरे 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगेगा!
जांच एजेंसियों के लिए टाइम-लिमिट तय कर दी गई है। किसी भी हाल में 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी ही होगी।
केस सालों-साल पेंडिंग न रहें, इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का आदेश दिया गया है।
चार्जशीट दाखिल होने के महज 3 महीने के अंदर अदालत को केस का ट्रायल पूरा करके फैसला सुनाना होगा।
पेपर लीक सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने के लिए राज्यों में स्पेशल टास्क फोर्स यानि STF गठित की जाएगी।
तो देखा आपने! एक तरफ विपक्ष जंतर-मंतर के लाठीचार्ज और नीट लीक का ढोल बजाकर सरकार को घेरने की फिराक में है, तो दूसरी तरफ मोदी सरकार ने 10 साल की जेल और 10 करोड़ के जुर्माने वाला ऐसा ब्रह्मास्त्र चला दिया है, जिसने विपक्ष के सारे हथियार छीन लिए हैं! अब पूरे देश की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या स्पीकर ओम बिरला की पहल पर सरकार और विपक्ष के बीच सुलह हो पाएगी? क्या विपक्ष इस ऐतिहासिक कानून पर संसद में बहस करेगा या फिर हंगामा करके युवाओं के इस बड़े बिल को लटकाए रखेगा?
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