तुकाराम मुंढे ने संस्थाओं के लिए खींची लक्ष्मण रेखा,28 फरवरी के बाद नॉनस्टॉप कार्रवाई

पुणे - NGO अनियमितता महाराष्ट्र राज्य के प्रशासन में अपनी सख्त कार्यशैली के लिए प्रसिद्ध IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने दिव्यांग कल्याण विभाग के प्रधान सचिव के रूप में पदभार संभालने के बाद से लगातार कार्रवाई का सिलसिला जारी रखा है। पिछले छह महीनों में उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। हालांकि यह कार्रवाई पिछले कुछ वर्षों से जारी थी,लेकिन मुंढे के कार्यकाल में इसे खास तेजी मिली है। राज्य में दिव्यांगों के लिए काम करने वाली संस्थाओं के कार्यों पर दिव्यांग कल्याण विभाग का नियंत्रण होता है। अब तक विभाग ने अनियमितताओं में लिप्त करीब 900 संस्थाओं की पंजीकरण रद्द कर दी है। चालू वर्ष में यह आंकड़ा 363 तक पहुंच चुका है,जिसमें मुंढे के कार्यकाल में की गई कार्रवाई का बड़ा हिस्सा शामिल है। पंजीकरण रद्द की गई संस्थाओं में सबसे अधिक 103 संस्थाएं छत्रपति संभाजीनगर विभाग की हैं। इसके अलावा पुणे की 60,कोकण की 52,अमरावती की 50,जबकि नाशिक और नागपुर की 49-49 संस्थाएं शामिल हैं। राज्य में दिव्यांगों के लिए काम करने वाली संस्थाओं की कुल संख्या लगभग 2000 बताई जाती है।

संस्थाएं कैसे काम करती हैं?

राज्य में दिव्यांगों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाएं शिक्षा, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पुनर्वास जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं। इनमें से कई संस्थाओं को सरकार से अनुदान मिलता है, जबकि कुछ CSR के तहत संचालित होती हैं। कुछ संस्थाएं स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं द्वारा भी चलाई जाती हैं। इन सभी संस्थाओं के लिए दिव्यांग कल्याण विभाग में पंजीकरण अनिवार्य है, जो अब ऑनलाइन उपलब्ध है। तुकाराम मुंढे के पदभार संभालने के बाद अक्टूबर 2025 में एक शासन निर्णय जारी किया गया था, जिसके तहत संस्थाओं के कामकाज की स्पष्ट कार्यप्रणाली तय की गई है और उसका पालन अनिवार्य किया गया है। सामाजिक संस्थाओं द्वारा संचालित कई संस्थाओं में अनियमितताएं पाए जाने पर 2012 से ही पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है, जिसे अब और सख्ती से लागू किया जा रहा है। संस्थाओं को दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम,2016 के तहत कार्य करना अनिवार्य है और इसके लिए दिव्यांग कल्याण आयुक्तालय में पंजीकरण जरूरी है। इसके लिए 28 फरवरी तक की समयसीमा तय की गई है। इसके बाद नियमों का पालन न करने वाली संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ऐसा स्पष्ट संकेत तुकाराम मुंढे ने दिया है।

संवादाता - यश सोलंकी

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