2014 से लापता स्पेशल फोर्सेस अधिकारी को सेवा से हटाने की सेना की कार्रवाई; अंतिम बार स्पेन और नॉर्वे में मिले थे

पुणे : भारतीय सेना ने पुणे के स्पेशल फोर्सेस अधिकारी कैप्टन शर्यफसिंह भोंसले के खिलाफ औपचारिक सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो पिछले एक दशक से लापता हैं और उन्हें ‘भगोड़ा’ घोषित किया गया है। 27 अक्टूबर 2025 की एक कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) में रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय ने कैप्टन भोंसले को निर्देश दिया है कि वे बताएं कि आर्मी एक्ट, 1950 के तहत उनकी सेवाएं क्यों न समाप्त की जाएं।

“लापता” स्पेशल फोर्सेस अधिकारी

कैप्टन भोंसले, जो पुणे के औंध के निवासी हैं और नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं, वर्ष 2009 में पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेस) की प्रतिष्ठित 2वीं बटालियन में नियुक्त हुए थे। उनके लापता होने के समय वे अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के एडीसी (Aide-De-Camp) के रूप में एक महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत थे। आधिकारिक नोटिस के अनुसार, अगस्त 2014 में वार्षिक अवकाश के बाद वे ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे। सेना के अधिकारियों ने बताया कि वे वास्तव में विदेश में थे। कैप्टन भोंसले स्पेन गए थे, जहां उन्होंने बिना मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) से आवश्यक अनुमति लिए छह दिन के अंतरराष्ट्रीय पैराजंपिंग फेस्टिवल में भाग लिया। इसके बाद उनकी लोकेशन नॉर्वे में मिली, जिसे उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स की गतिविधियों के आधार पर अंतिम ज्ञात स्थान माना गया। तब से उन्हें आधिकारिक तौर पर न तो देखा गया है और न ही उनसे कोई संपर्क हुआ है। 11 साल बाद कानूनी कार्रवाई हालांकि 2016 में सिविल पुलिस को एक गिरफ्तारी रोल (Apprehension Roll) जारी किया गया था, फिर भी अधिकारी अब तक पकड़ से बाहर हैं। सेना प्रमुख ने उनकी लंबी अवैध अनुपस्थिति को “गंभीर कदाचार” और सेवा में बनाए रखने के लिए “अवांछनीय” बताया है। यह नोटिस पुणे स्थित उनके पारिवारिक घर पर भेजा गया है। यदि 30 दिनों के भीतर कोई जवाब नहीं मिलता है, तो सेना उनकी नियुक्ति को एकतरफा (ex-parte) समाप्त करने की कार्रवाई आगे बढ़ाएगी।

संवादाता - यश सोलंकी 

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